VRS Application Controversy: ओडिशा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हुई वैसे ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) आरएस गोपालन ने बड़ा फैसला ले लिया है. उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS के लिए आवेदन किया है. साल 2001 बैच के IAS अधिकारी गोपालन ने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी कारण बताए हैं.
गोपालन जुलाई 2024 से ओडिशा के CEO की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इसी दौरान राज्य में SIR की पूरी प्रक्रिया हुई. 21 सितंबर को जारी अंतिम मतदाता सूची में राज्य में करीब 3.16 करोड़ मतदाता दर्ज हुए.
SIR से पहले यह संख्या लगभग 3.34 करोड़ थी. अधिकारियों के मुताबिक, मृत, दूसरी जगह चले गए, डुप्लीकेट और सत्यापन में नहीं मिले मतदाताओं के नाम हटाए गए.
SIR प्रक्रिया पर उठे थे कई सवाल
SIR को लेकर ओडिशा में राजनीतिक विवाद भी सामने आया है. विपक्षी दलों ने बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए. इसी बीच धामनगर क्षेत्र में कुछ BLOs की शिकायत का मामला भी सामने आया. जहां उनके लॉगिन और OTP का इस्तेमाल कर Form-7 के जरिए मतदाता नाम हटाने के आवेदन अपलोड किए जाने के आरोप लगे. मामले में एक अधिकारी को निलंबित किया गया और जांच शुरू की गई.ऐसे माहौल में CEO गोपालन का VRS आवेदन चर्चा में आ गया है.
गोपालन ने खुद बताई फैसले के पीछे की वजह
गोपालन ने खुद साफ किया है कि उनके फैसले को SIR विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि वह पिछले कुछ समय से सेवा छोड़ने पर विचार कर रहे थे. व्यक्तिगत व स्वास्थ्य कारणों से अब VRS का फैसला लिया है. उन्होंने यह भी कहा कि SIR और अंतिम मतदाता सूची का काम पूरा होने के बाद ही उन्होंने आवेदन किया.गोपालन के VRS आवेदन पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है.
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