TMC Name Symbol Freeze: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दी है. जिसके बाद साफ हो गया कि टीएमसी का हाल भी शिवसेना की तरह ही आने वाले दिनों में हो सकता है. यही वजह है कि चुनाव आयोग का यह फैसला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है.
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आयोग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को शिवसेना और NCP से जुड़े पुराने विवादों से जोड़ते हुए बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दूसरी तरफ यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि चुनाव आयेाग ने कहीं विपक्ष को एक बार फिर एकजुट होने की वजह तो नहीं दे दी है.
राहुल ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC में उन्हें एक जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है. उनके मुताबिक, बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर पहले किसी पार्टी को विभाजित करते हैं .इसके बाद उसके चुनाव चिन्ह पर भी कार्रवाई होती है. राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में ‘वोट चोरी’, ‘सरकार चोरी’ और ‘पार्टी चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाया.
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आयोग की जिम्मेदारी जनता के जनादेश की रक्षा करना है. उनका आरोप है कि आयोग इसके उलट उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को प्रभावित करना चाहती हैं.
क्या है TMC का विवाद?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी के नियंत्रण और आधिकारिक नाम-सिंबल को लेकर दो गुट आमने-सामने हैं. चुनाव आयोग ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों को देखते हु नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिन्ह को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया है.
आयोग ने दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प मांगे हैं. दोनों पक्षों को तीन-तीन नाम और उपलब्ध चुनाव चिन्हों में से तीन-तीन विकल्प देने के लिए कहा गया था. राहुल गांधी ने इस मामले को केवल ममता बनर्जी से जुड़ा विवाद मानने के बजाय इसे सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं से जुड़ा मुद्दा बताया है.
ये भी पढ़ें:‘चरित्र हनन बंद करो…’, दिशा सालियान केस को लेकर आदित्य-उद्धव ठाकरे ने तोड़ी चुप्पी
