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‘स्कूलों में मुफ्त में मिले सेनेटरी पैड, वरना मान्यता होगी रद्द…’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

Supreme Court Decision On School

सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court On School: सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली बच्चियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई भी सरकार स्कूली बच्चियों को टॉयलेट और सेनेटरी पैड देने में फेल होती है, तो उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा. इसके साथ ही कोर्ट ने इन चीजों की कमी को लड़कियों के शिक्षा के अधिकार, स्वास्थ्य के अधिकार और समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया है. यह आदेश न सिर्फ सरकारी स्कूल के लिए है, बल्कि निजी स्कूलों के लिए है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की नेता जया ठाकुर द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया है. जानें कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने मासिक धर्म को लेकर कहा कि यह न सिर्फ गरिमा को बल्कि निजता के अधिकार को भी छीनता है. स्कूलों में सैनेटरी पैड नहीं होने की वजह से कई बार लड़कियां स्कूल छोड़ने और अनुपस्थित रहने के लिए मजबूर होती हैं. स्कूलों में सैनेटरी पैड और साफ टॉयलेट होना बहुत जरूरी है.

सरकारी और निजी दोनों स्कूलों के लिए जरूरी

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कोर्ट ने सभी राज्यों को दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूलों में चाहे वो सरकारी हों या प्राइवेट जेंडर-सेग्रिगेटेड शौचालय होना जरूरी है. इसके साथ ही स्कूलों में पर्याप्त पानी की व्यवस्था , साबुन और हैंडवॉश की सुविधा होनी चाहिए. सभी स्कूलों में मानकों के अनुरूप ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी पैड मुफ्त में दिए जाएं और ऐसी जगह पर रखा जाए, जहां से छात्राएं आसानी से ले सकें. इसके अलावा स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (MHM) कार्नर भी बनाएं. मासिक धर्म को लेकर शिक्षकों, छात्राओं के साथ ही सभी स्टाफ को प्रशिक्षण और जागरूकता दी जाए.

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