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तमिलनाडु: CM विजय के ज्योतिष OSD पर बवाल! विरोध के बाद बैकफुट पर सरकार, 24 घंटे में नियुक्ति रद्द

ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रीवेल

ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रीवेल

Astrologer OSD Appointment Cancelled: तमिलनाडु की राजनीति इन द‍िनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां नेताओं के बयानों के साथ-साथ नई सरकार की तरफ से की जा रही नियुक्तियां भी चर्चा में हैं. मंगलवार 12 मई को मुख्यमंत्री विजय ने अपनी करीबी ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रीवेल को मुख्यमंत्री कार्यालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) नियुक्त किया था. हालांकि यह फैसला 24 घंटे पूरे होने से पहले ही वापस ले लिया गया है.

विजय के सीएम बनने को लेकर उन्हें ज्योतिष रिकी राधन पंडित वेट्रीवेल ने पहली भविष्यवाणी की थी. यही वजह है कि इनाम के तौर पर उन्हें ओएसडी बनाया गया था. यह नियुक्ति विजय सरकार बनने के कुछ ही दिनों बाद हुई थी.

विपक्ष का विरोध पड़ा भारी

नियुक्ति की जानकारी जैसे ही सामने आई विपक्ष के साथ-साथ विजय की सहयोगी पार्टियों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए. कांग्रेस, VCK, CPI और CPM जैसे दलों ने कहा कि एक “ज्योतिषी” को सरकारी प्रशासन में अहम पद देना वैज्ञानिक सोच और धर्मनिरपेक्ष राजनीति के खिलाफ है.    

कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किसी ज्योतिषी को OSD जैसी सरकारी जिम्मेदारी क्यों दी गई. इसके बाद मामला तेजी से राजनीतिक विवाद बन गया.  बढ़ते दबाव को देखते हुए 13 मई को सरकार ने नया आदेश जारी कर रिकी राधन पंडित की नियुक्ति रद्द कर दी. अब इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा देशभर में हो रही है.  

कौन हैं रिकी राधन पंडित?

रिकी राधन पंडित वेट्रीवेल तमिलनाडु के इरोड इलाके के रहने वाले हैं. वे लंबे समय से ज्योतिष, अंक शास्त्र और ध्यान आधारित सलाह देने का काम कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें लगभग 40 साल का अनुभव है.   वे पहले “पंडित वेट्रीवेल” नाम से जाने जाते थे, लेकिन बाद में दिल्ली आने के बाद उन्होंने “राधन पंडित” नाम अपना लिया था.    

राधन को विजय का माना जाता है बेहद करीबी

रिकी राधन पंडित को विजय का बेहद करीबी माना जाता है. उन्होंने चुनाव से पहले दावा किया था कि विजय तमिलनाडु की राजनीति में “सुनामी जैसी जीत” हासिल करेंगे. चुनाव नतीजों के बाद TVK की शानदार सफलता के दौरान वे विजय के सबसे करीबी लोगों में नजर आए.

यह भी कहा गया कि विजय के शपथ ग्रहण का समय बदलने की सलाह भी उन्होंने ही दी थी, क्योंकि उन्होंने सुबह 10 बजे का समय ज्यादा शुभ बताया था.

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि विजय सरकार अपने कार्यकाल की शुरुआत में किसी बड़े विवाद में नहीं फंसना चाहती थी. इसलिए सहयोगी दलों के दबाव और बढ़ती आलोचना को देखते हुए सरकार ने तुरंत यू-टर्न ले लिया. 

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