Vistaar NEWS

11 रुपए की दवा पर MRP 325 Rs, अस्पतालों में बिल का ‘काला’ खेल, तुकाराम मुंढे ने बताया कैसे बढ़ रहा बोझ

IAS Tukaram Mundhe

आईएएस तुकाराम मुंढे

Tukaram Mundhe explains Scam: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के प्रमुख तुकाराम मुंढे अपने काम को लेकर पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में हैं. हाल ही में उन्होंने पाया कि महाराष्ट्र में अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों के सर्वे में ट्रेड प्राइस और प्रिंटेड मैक्सिमम रिटेल प्राइस के बीच भारी अंतर है. जो अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज और उसके परिवार के लिए चिंता का विषय है. तुकाराम मुंढे के इस खुलासे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

तुकाराम मुंढे ने मेडिकल विभाग में हो रही धांधली को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी दी है. जिसके अनुसार, ‘अस्पताल के बिल का सबसे महंगा हिस्सा शायद अस्पताल तक कभी पहुंचता ही नहीं है. इलाज के लिए भर्ती मरीज को यह पता लगाने का कोई तरीका नहीं होता कि किसी मेडिकल सामान की कीमत उसकी असल लागत है या वार्ड तक पहुंचने से बहुत पहले तय किया गया मार्कअप. जानकारी का यह अंतर असल में पब्लिक हेल्थ से जुड़ा एक मुद्दा है.’

2,841% प्रतिशत ज्यादा MRP

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में अस्पताल के सामानों के एक सर्वे में पाया गया कि ₹11.05 की ट्रेड प्राइस वाले IV इन्फ्यूजन सेट पर ₹325 की MRP छपी थी. यानी 2,841% का मार्कअप. ₹6.75 में खरीदी गई सिरिंज पर ₹57.20 की MRP थी. वहीं ₹29.41 में खरीदे गए कैथेटर पर ₹310 की MRP थी.

ये भी पढे़ंः UPI से 2000 से ज्यादा की पेमेंट पर 0.40 फीसदी MDR चार्ज, 15 अक्टूबर से लागू, जानिए किनके लिए होगा फ्री

IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने बताया कि ये ऐसी चीजें नहीं हैं जिन्हें मरीज अपनी मर्जी से चुनकर खरीदते हैं. इलाज के दौरान मरीज न तो कीमतों की तुलना कर सकते हैं, न ही कोई दूसरा विकल्प ढूंढ सकते हैं, और न ही बॉक्स पर छपी कीमत पर सवाल उठा सकते हैं. MRP अक्सर मैन्युफैक्चरर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स तय करते हैं, और यह ट्रेड प्राइस से बहुत ज्यादा और बिना किसी साफ वजह के अंतर पर होती है. नतीजा यह होता है कि कीमत चुकाने वाले व्यक्ति के पास ही उसे परखने के लिए सबसे कम जानकारी होती है.

गाइडलाइंस बनाने की सिफारिश

उन्होंने बताया कि तय दवाओं की कीमतें ‘ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013’ के तहत सीमित होती हैं. ज्यादातर मेडिकल डिवाइस और सामान इस दायरे में नहीं आते, इसलिए उनकी कीमतों और उनसे जुड़ी जानकारी पर लगभग कोई निगरानी नहीं होती. इन परिणामों की समीक्षा करने और ट्रेड खरीद कीमत व घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर के बारे में साफ गाइडलाइंस बनाने की सिफारिश डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स और NPPA से की गई है. यह न सिर्फ कीमत के अंतर को खत्म करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि उस जानकारी के अंतर को भी पाटने की कोशिश है जिसे मरीजों को अकेले झेलना पड़ता है.

Exit mobile version