Vistaar NEWS

‘अकेलापन झेलना, रोजाना 15 सिगरेट पीने जितना खतरनाक’, इस रिसर्च रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया

File Image

सांकेतिक तस्वीर

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां हर कोई करियर, पैसा और सफलता के पीछे दौड़ रहा है, वहीं एक ऐसा सच सामने आया है जो अक्सर नजरअंदाज हो जाता है. अच्छे रिश्ते ही अच्छी सेहत की असली कुंजी हैं. लोग जिम, डाइट और दवाइयों पर ध्यान देते हैं, लेकिन अपने करीबियों से दूर होते जा रहे हैं. हालिया रिसर्च, खासतौर पर हार्वर्ड स्टडी ऑफ एडल्ट डेवलपमेंट, यह बताती है कि इंसान की खुशी और लंबी उम्र का सीधा संबंध उसकी सोशल लाइफ और रिश्तों की मजबूती से है. यानी जो लोग अपने परिवार और दोस्तों के करीब रहते हैं, वे ज्यादा संतुष्ट और स्वस्थ जीवन जीते हैं.

इस स्टडी की शुरुआत साल…

दरअसल, इस स्टडी की शुरुआत साल 1938 में ग्रेट डिप्रेशन के दौर में हुई थी, जब वैज्ञानिकों ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 268 छात्रों की जिंदगी और सेहत को ट्रैक करना शुरू किया. उनका मकसद था यह समझना कि आखिर एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन का राज क्या है. करीब 80 साल तक चली इस रिसर्च में प्रतिभागियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति से जुड़ा बड़ा डेटा इकट्ठा किया गया, जिससे यह दुनिया की सबसे लंबी चलने वाली लाइफ स्टडी में से एक बन गई.

80 सालों से चल रही है स्टडी

यह स्टडी, जो करीब 80 सालों से चल रही है, साफ तौर पर दिखाती है कि मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते न केवल मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं. इसके उलट, जो लोग अकेलेपन का शिकार होते हैं, वे धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आने लगते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अकेलापन केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक खतरनाक स्वास्थ्य समस्या है. यह व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर करता है और आगे चलकर डिप्रेशन और अल्जाइमर्स जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है.

कार्डियोवस्कुलर डीजीएस का खतरा

इतना ही नहीं, रिसर्च में यह भी सामने आया है कि जो लोग सामाजिक रूप से अलग-थलग रहते हैं, उनमें कार्डियोवस्कुलर डीजीएस का खतरा भी काफी बढ़ जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक, जब व्यक्ति अपने करीबियों के साथ समय बिताता है, तो शरीर में “हैप्पी हार्मोन” यानी ऑक्सीटोसिन बढ़ता है, जिससे तनाव कम होता है और मन शांत रहता है. वहीं, अकेलेपन की स्थिति में शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है.

रिसर्च का एक बेहद चौंकाने वाला पहलू

रिसर्च का एक बेहद चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि लंबे समय तक अकेलापन झेलना, रोजाना 15 सिगरेट पीने जितना खतरनाक हो सकता है. यह न केवल इम्युनिटी को कमजोर करता है, बल्कि शरीर को बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील बना देता है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि रिश्तों की संख्या से ज्यादा उनकी गुणवत्ता मायने रखती है. यानी 100 जान-पहचान वाले लोगों से बेहतर है 2-3 ऐसे रिश्ते, जिनमें भरोसा, समझ और भावनात्मक सहयोग हो.

ऐसे में जरूरी क्या है?

ऐसे में जरूरी है कि लोग अपनी व्यस्त जिंदगी से थोड़ा समय निकालकर अपने रिश्तों को मजबूत करें. परिवार के साथ बैठकर बात करना, दोस्तों से खुलकर अपनी बातें साझा करना और भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना न केवल मानसिक सुकून देता है, बल्कि शरीर को भी स्वस्थ रखता है. कुल मिलाकर, यह कहना गलत नहीं होगा कि अच्छे रिश्ते किसी दवा से कम नहीं हैं. अगर जिंदगी को लंबा, खुशहाल और संतुलित बनाना है, तो अपनों के साथ जुड़ाव बनाए रखना बेहद जरूरी है.

ये भी पढ़ें: इंडक्शन यूज करने के ये हैं 10 टिप्स, जानिए कैसे सही तरीके से इस्तेमाल करें

Exit mobile version