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MP News: मऊगंज में मौत पर मुनाफे का खेल! संबल योजना में 20 लाख का फर्जीवाड़ा, 6 मामलों में बड़ा खुलासा, 5 लोगों को बनाया दोषी

Janpad Panchayat Building, Hanumana

जनपद पंचायत भवन हनुमना

MP News: मऊगंज जिले के हनुमना जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरा में सरकारी योजनाओं के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है. मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना और म.प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल के तहत दी जाने वाली अनुग्रह सहायता राशि में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है. जिसकी खबर विस्तार न्यूज़ में प्रमुखता से दिखाई तो प्रशासन हरकत में आया हनुमना जनपद पंचायत के सीईओ द्वारा जांच टीम तैयार कर जांच कराई गई और जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जांच में खुला खेल: सामान्य मौत को बताया दुर्घटना

मऊगंज जिले के हनुमना जनपद के ग्राम पंचायत देवरा में 06 प्रकरणों में करीब 20 लाख रुपये के नियम विरुद्ध भुगतान का आरोप लगाया गया था. जांच दल की जांच में परतें खुलीं तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच में पाया गया कि 5 मामलों में सामान्य मृत्यु को दुर्घटना बताकर लाभार्थियों को 2 लाख के बजाय 4-4 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया. यह सीधे-सीधे सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला है.

नियमों को दरकिनार कर जारी किया भुगतान

एक अन्य मामले में शकुन्तला साहू की मौत पानी में डूबने से हुई थी, जिसका भुगतान नियमानुसार राजस्व विभाग के माध्यम से होना चाहिए था. लेकिन नियमों को ताक पर रखकर जनपद पंचायत द्वारा ही 4.06 लाख रुपये जारी कर दिए गए. इस प्रकार की कार्यवाही से स्पष्ट है कि जिम्मेदारों ने प्रक्रिया और नियमों की खुली अनदेखी की.

कई अधिकारी-कर्मचारी जांच के घेरे में

हनुमना जनपद सीईओ ने बताया कि जांच रिपोर्ट में ग्राम पंचायत देवरा के सचिव, सरपंच, जीआरएस सहित जनपद पंचायत में पदस्थ शाखा प्रभारी और कम्प्यूटर ऑपरेटर वीरेन्द्र कुमार पटेल दोषी पाए गए है. यह पूरा मामला दर्शाता है कि किस तरह योजनाओं के नाम पर संगठित तरीके से गड़बड़ी की गई.

कार्रवाई की सिफारिश, अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा

मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हेतु प्रतिवेदन मऊगंज जिला कलेक्टर को भेज दी है अब सभी की निगाहें हैं मऊगंज कलेक्टर पर टिकी हैं कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार पर कितनी सख्ती दिखाता है. सवाल यह भी है कि गरीबों के नाम पर बनी योजनाओं में आखिर कब तक इस तरह का खेल चलता रहेगा.

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