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MP News: साइबर ठगों के निशाने पर रीवा और सतना, एक साल में 1300 लोग को बनाया शिकार

Rewa

साइबर ठगी (File Image)

MP News: साइबर अपराध के मामलों में इस समय सतना और रीवा जिले प्रदेश के सबसे चिंताजनक जिलों में शामिल हो गए हैं. डिजिटल ठगी ने लोगों की कमाई, भरोसे और मानसिक शांति तीनों पर सीधा हमला बोला है. रीवा में पिछले एक साल में 900 से ज्यादा लोग साइबर फ्रॉड के शिकार हुए हैं. वहीं सतना में हर साल 400 से अधिक शिकायतें दर्ज हो रही हैं. इस तरह दोनों जिलों को मिलाकर एक साल में करीब 1300 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए हैं. हालांकि, इसके बावजूद पुलिस अब तक बड़े अपराधियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रही है. सतना में करीब ढाई करोड़ रुपये की ठगी के मुकाबले केवल 25 लाख रुपये ही बचाए जा सके हैं. वहीं रीवा में पुलिस अब तक सिर्फ 15 लाख रुपये की ही रिकवरी करवा पाई है.

हाई-रिस्क घोषित

साइबर क्राइम के मामलों में सतना और रीवा को अब हाई-रिस्क जिले घोषित किया गया है. ये जिले इंदौर और भोपाल के बराबर की श्रेणी में पहुंच चुके हैं. इन सभी जिलों में 30-30 साइबर एक्सपर्ट की तैनाती का फैसला लिया गया है. सतना और रीवा में डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन, एटीएम फ्रॉड, म्यूल अकाउंट्स और सोशल मीडिया के जरिए डर फैलाने जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं. वहीं विंध्य क्षेत्र के अन्य जिलों को तीसरी श्रेणी में रखा गया है, जहां 10-10 साइबर वारियर्स की नियुक्ति की जाएगी. इन सभी को भोपाल में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

रीवा में साल भर में 927 लोग बने शिकार

रीवा जिले में साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. पिछले साल यहां 927 लोग साइबर फ्रॉड का शिकार हुए, जिनसे कुल 4.95 करोड़ रुपये की ठगी की गई. सबसे ज्यादा मामले ऑनलाइन जॉब के नाम पर, फर्जी मैसेज और एपीके फाइल डाउनलोड कराने के जरिए सामने आए हैं. मोबाइल हैकिंग और बैंक खातों से रकम निकालने की घटनाएं अब आम हो गई हैं. रीवा इस समय साइबर फ्रॉड नेटवर्क के निशाने पर है. पुलिस ने ऐसे कई संगठित नेटवर्क का

जिन पीड़ितों ने ठगी के तुरंत बाद साइबर सेल के हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर सूचना दर्ज करवाई, उनके रुपये अपराधियों के हाथ लगने से बच गए. रीवा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक खातों को होल्ड करवाया और पीड़ितों को करीब 15 लाख रुपये वापस कराए हैं. इसके अलावा अभी भी बड़ी रकम विभिन्न खातों में होल्ड है, जिनकी कानूनी प्रक्रिया फिलहाल लंबित बताई जा रही है.

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