MP News: इंदौर के मुक्ति धाम पर 12 सालों से रखी हुई 300 अस्थियों का नर्मदा में शुक्रवार को विसर्जन किया गया. जूनी इंदौर धाम पर चल रही भागवत कथा का शुक्रवार को समापन था. भागवत कथा के समापन के साथ ही अस्थियों को मां नर्मदा में समर्पित किया गया.
साल 2013 से रखी थीं अस्थियां
जानकारी के मुताबिक मुक्तिधाम पर अस्थियां साल 2013 में रखी गईं थीं. बताया जा रहा है कि कुछ कारणों से परिजन अस्थियों को साथ नहीं ले गए थे. इसके बाद परिजनों को सूचना भी दी गई. लेकिन इसके बावजूद परिजन अस्थियां लेने नहीं आए. जिसके बाद भागवत कथा के समापन के साथ ही विधि-विधान के साथ अस्थियों को नर्मदा के तट पर विसर्जित कर दिया गया. खेड़ीघाट पर शुक्रवार दोपहर ब्राह्मणों ने पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अस्थियों को विसर्जित किया.
परिजन नहीं आए तो मोक्ष धाम प्रशासन ने किया विसर्जन
मोक्ष धाम समिति ने बताया कि अस्थियों को लेकर सार्वजनिक सूचना दी गई थी. इसमें मृतकों के परिजनों से अपील की गई थी कि वे 30 जनवरी तक दिवंगत की अस्थियां मुक्तिधाम से ले जाएं. लेकिन इसके बावजूद 300 मृतकों के परिजन अस्थियों लेने नहीं आए. हालांकि कुछ मृतकों के परिजन अस्थियां लेने आए थे. इसके बाद समिति ने 300 मृतकों की अस्थियों का नर्मदा में विसर्जन कर दिया.
कई मुक्ति धामों पर रखी हैं अस्थियां
जानकारी के मुताबिक इसके अलावा शहर में कई मुक्ति धाम हैं, जहां इस तरह दिवंगतों की अस्थियां रखी हैं. लेकिन परिजन अभी तक अस्थियों को नहीं ले गए हैं. विद्वानों का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार सगे-संबंधियों के अस्थि विसर्जन करने पर दिवंगत की आत्मा को शांति मिलती है और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है.
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