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MP News: इंदौर में फिर सक्रिय हुआ हनी ट्रैप गैंग! श्वेता जैन समेत 5 गिरफ्तार, कारोबारी से की 1 करोड़ की ब्लैकमेलिंग

Shweta Jain, the mastermind behind the honey trap case

हनी ट्रैप मामले की मास्‍टमाइंड श्वेता जैन

MP News: इंदौर में हनी ट्रैप का एक और बड़ा मामला सामने आया है. चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2019 के चर्चित हनी ट्रैप केस की मुख्य आरोपी श्वेता जैन का नाम एक बार फिर सामने आया है. इस बार गिरोह के निशाने पर शराब और प्रॉपर्टी कारोबारी थे. मामले में एक कारोबारी ने करीब 1 करोड़ रुपए की ब्लैकमेलिंग की शिकायत दर्ज करवाई है. जांच में कुछ पुलिसकर्मियों और एक बीजेपी नेत्री की भूमिका भी सामने आई है. फिलहाल पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 2 अन्य लोगों से पूछताछ जारी है.

अलका दीक्षित ने कारोबारी को फंसाया

शहर में लेडी डॉन के नाम से कुख्यात अलका दीक्षित ने शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर से दोस्ती की और उसके साथ जमीन के कारोबार में साझेदारी शुरू की. इसी दौरान अलका ने कारोबारी के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करवा लिए. बाद में इन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसने 1 करोड़ रुपए की मांग की. हालांकि चिंटू ठाकुर ने पैसे देने के बजाय क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज करवा दी. शिकायत के बाद पुलिस ने जब अलका को हिरासत में लिया, तो पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए.

जेल में हुई दोस्ती

पुलिस जांच में पता चला कि अलका दीक्षित पर पहले से 16 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. वर्ष 2020 में जेल के दौरान उसकी मुलाकात हनी ट्रैप केस की आरोपी श्वेता जैन से हुई थी. दोनों एक ही बैरक में बंद थीं. यहीं से दोनों के बीच दोस्ती हुई और श्वेता ने अलका को लोगों को जाल में फंसाने और ब्लैकमेलिंग के तरीके बताए. जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों लगातार संपर्क में रहीं.

बीजेपी नेत्री और पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध

मामले में पुलिस ने अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप दीक्षित, प्रॉपर्टी ब्रोकर लखन चौधरी, अभिलाषा चौधरी उर्फ रेशु और श्वेता जैन को आरोपी बनाया है. वहीं पुलिस आरक्षक विनोद शर्मा और जितेंद्र पुरोहित की भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस ने जितेंद्र पुरोहित को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है.

भोपाल से बनती थी ब्लैकमेलिंग की पूरी रणनीति

सागर निवासी बीजेपी नेत्री अभिलाषा उर्फ रेशु चौधरी पर आरोप है कि वह नेताओं, कारोबारियों और अफसरों को जाल में फंसाकर उनके आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करवाती थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि भोपाल में बैठकर श्वेता जैन और रेशु चौधरी पूरी रणनीति तैयार करती थीं. मोबाइल, व्हाट्सएप चैट, ऑडियो-वीडियो क्लिप और अन्य डिजिटल डेटा के जरिए लोगों को ब्लैकमेल किया जाता था.

कई और नाम सामने आने की आशंका

क्राइम ब्रांच फिलहाल आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट लॉग और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है. अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं.

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