MP News: छतरपुर के नौगांव में एक ऐसी प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जिसने पारंपरिक सामाजिक रीति-रिवाजों पर सोचने को मजबूर कर दिया है. जहां आमतौर पर किसी परिजन के निधन के बाद मृत्यु भोज आयोजित किया जाता है, वहीं स्वर्गीय गोपाल कठेल के परिवार ने इस परंपरा को त्यागकर मानवता को प्राथमिकता दी. स्व. गोपाल कठेल के पुत्र कामाख्या उर्फ कान्हा कठेल और समाजसेविका तृप्ति कठेल ने मृत्यु भोज के स्थान पर एक अनाथ बेटी के कन्यादान का संकल्प लेकर समाज को नई दिशा दी.
परिवार ने विवाह में बेटी को दिए 75 प्रकार के सामान
करीब दस वर्ष पहले माता-पिता को खो चुकी लक्ष्मी अनुरागी के विवाह में कठेल परिवार ने भावुक होकर सहयोग किया. यह सहयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी का प्रतीक भी है. परिवार ने बेटी को 75 प्रकार की विवाह सामग्री भेंट की, जिनमें 32 इंच एलसीडी, कूलर, अलमारी, सोने की कील, चांदी की चुटकी, 21,000 रुपये की एफडी और 5,100 रुपये नगद राशि शामिल है.
कठेल परिवार का यह कदम वैचारिक बदलाव का संकेत
मृत्यु भोज की परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं. लोगों का मानना है कि यह परंपरा सामाजिक दबाव और दिखावे का परिणाम बन चुकी है. कठेल परिवार का यह कदम एक वैचारिक बदलाव का संकेत है, जहां मृतक की स्मृति में दिखावे के बजाय समाज सेवा को महत्व दिया गया. यह संदेश स्पष्ट करता है कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो किसी जरूरतमंद के जीवन में स्थायी खुशियां ला सके.
इस अवसर पर लक्ष्मी अनुरागी ने कठेल परिवार का आभार व्यक्त किया. भाई के निधन के बाद बहन की आंखों में भी आंसू छलक उठे. बेटी की मौसी और मौसा ने भी इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया.
अनोखी पहल को बताया मानवता की मिसाल
स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने इसे मानवता की मिसाल बताया है. कामाख्या उर्फ कान्हा कठेल और तृप्ति कठेल ने लोगों से अपील की है कि मृत्यु भोज जैसे आयोजनों पर खर्च करने के बजाय निर्धन और अनाथ बेटियों की सहायता करें.
नई पहल से हुई सामजिक परिवर्तन की शुरुआत
यह पहल केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत है. यदि समाज इस संदेश को अपनाए, तो न केवल आर्थिक संसाधनों का सदुपयोग होगा, बल्कि कई जरूरतमंद बेटियों के जीवन में नई रोशनी भी पहुंचेगी. परंपराओं को बदलने का साहस ही समाज को आगे बढ़ाता है और कठेल परिवार ने यह साहस दिखाया है.
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