MP News: फर्जी शराब परमिट और सरकार को रॉयल्टी दिए बिना अवैध परिवहन के सनसनीखेज मामले में आखिरकार दो साल बाद सोम ग्रुप पर कार्रवाई हुई है. कोर्ट की सख्त टिप्पणी और सवालों के बाद आबकारी विभाग ने सोम ग्रुप का लाइसेंस निलंबित कर दिया. यह आदेश आबकारी आयुक्त ने न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया है.
क्या है पूरा मामला?
मामला साल 2023-24 का है, जब उड़नदस्ते ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे शराब का परिवहन करते हुए 5 से 6 आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा था. जांच में सामने आया था कि शराब की खेप बिना रॉयल्टी भुगतान के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाई जा रही थी, जिससे शासन को भारी राजस्व नुकसान हुआ. चौंकाने वाली बात यह रही कि मामले में नोटिस जारी होने के बावजूद लंबे समय तक सोम ग्रुप का लाइसेंस निलंबित नहीं किया गया. इसी देरी पर न्यायालय ने आबकारी विभाग को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा था, “नोटिस के बाद भी लाइसेंस क्यों नहीं किया गया सस्पेंड?” कोर्ट की इस फटकार के बाद विभाग हरकत में आया और अब जाकर लाइसेंस पर कार्रवाई की गई.
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शराब कारोबार में नियमों से खिलवाड़ और राजस्व चोरी को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मामले की आगे भी गहन जांच की जा रही है और दोषियों पर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं.
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कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हुई समूह पर कार्रवाई
प्रशासनिक हलकों में यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से दबा हुआ था और अब कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही उस पर निर्णायक प्रहार हुआ है. इस कार्रवाई को प्रदेश में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है.
