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MP में बाघों की सुरक्षा पर 390 करोड़ का अतिरिक्त खर्च, टेक्नोलॉजी और पुनर्वास पर सबसे ज्यादा निवेश

Tiger (File Photo)

बाघ(File Photo)

MP News: देश में सबसे अधिक बाघों की संख्या वाला राज्य मध्य प्रदेश बाघों की सुरक्षा और संरक्षण पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है. राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए टाइगर रिजर्व, अभयारण्यों और बफर जोन में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है. पिछले दिनों की मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने 390 करोड़ का प्रावधान किया है. इसमें बफर जोन में खास तौर पर पुल-पुलिया, पानी की व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी काम के लिए बजट दिया गया है.

सुरक्षा के लिए इन पर किया जा रहा है सबसे ज्यादा खर्च

बाघों की सुरक्षा के लिए खर्च की जाने वाली राशि का बड़ा हिस्सा वन सुरक्षा बल, एंटी-पोचिंग कैंप, सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, रेडियो कॉलर, वाहन और हथियार, और वनकर्मियों के प्रशिक्षण पर किया जा रहा है. इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए ग्रामीण पुनर्वास, मुआवजा वितरण और जागरूकता कार्यक्रमों पर भी बजट का प्रावधान है. राज्य में वर्तमान में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा, संजय-डुबरी, वीरांगना दुर्गावती और रातापानी समेत कई टाइगर रिजर्व संचालित हैं, जिनकी सुरक्षा और प्रबंधन के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित हैं. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार की प्रोजेक्ट टाइगर योजना के तहत मिलने वाली केंद्रीय सहायता के साथ-साथ राज्य सरकार अपने स्तर पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराती है. इसमें बाघों की गणना, आवास सुधार, जल स्रोतों का विकास और शिकारियों पर निगरानी जैसे कार्य शामिल हैं.

सुरक्षा पर अतिरिक्त आने वाले समय पर आएगा बोझ

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार निवेश और सख्त निगरानी व्यवस्था के कारण ही मध्य प्रदेश बाघ संरक्षण में देश के अग्रणी राज्यों में बना हुआ है. हालांकि, बढ़ती बाघ आबादी के साथ सुरक्षा और संसाधनों की चुनौती भी बढ़ रही है, जिससे आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में खर्च और बढ़ने की संभावना है.

हर साल बढ़ रही बाघ के मरने की संख्या

मध्य प्रदेश सरकार बाघ संरक्षण को लेकर काफी संवेदनशील है. देश में बाघ संरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश अग्रणी राज्यों में बना हुआ है. हालांकि इन सबके बावजूद राज्यों में बाघों की मौत की संख्या साल दर साल बढ़ी है.

साल- बाघों की मौत
2021- 34
2022-43
2023-45
2024-46
2025-55

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