MP News: गर्लफ्रेंड पर खर्च करने, महंगी गाड़ी-मोबाइल और मेट्रो सिटी लाइफस्टाइल का शौक पूरा करने के लिए एक युवक ने झपटमारी की वारदात को अंजाम दिया. बागसेवनिया पुलिस ने एम्स अस्पताल की लिफ्ट में महिला से मंगलसूत्र झपटने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी गया मंगलसूत्र बरामद करने में सफलता हासिल की है.
क्या है पूरा मामला?
भोपाल एम्स में मंगलसूत्र झपटने की सूचना बागसेवनिया थाने को 27 जनवरी को मिली. रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह एम्स अस्पताल में अटेंडर है. 25 जनवरी को वह एम्स अस्पताल ब्लड बैंक के पीछे स्थित 12 नंबर लिफ्ट से ग्राउंड फ्लोर से फर्स्ट फ्लोर जा रही थी. उसी दौरान मुंह पर मास्क लगाए एक अज्ञात युवक लिफ्ट में सवार हुआ. प्रथम तल पर लिफ्ट का गेट खुलते ही आरोपी ने मौका पाकर फरियादी के गले में पहना सोने का मंगलसूत्र झपट लिया और सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए फरार हो गया.
पुलिस ने आरोपी को लहारपुर से गिरफ्तार किया
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम का गठन कर एम्स परिसर एवं अस्पताल तक पहुंच मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांचा. लिफ्ट में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी का वीडियो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में सर्कुलेट किया. लगातार तलाश के बाद आरोपी को कटारा हिल्स क्षेत्र के लहारपुर से गिरफ्तार किया गया.
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुनील मीणा पिता रामेश्वर मीणा (उम्र 25 वर्ष), निवासी ग्राम नयागांव, पोस्ट ननवता, थाना मोटपुर, जिला बारां (राजस्थान) के रूप में हुई. आरोपी की निशानदेही पर चोरी गया मंगलसूत्र पुष्पराज सोनी पिता गोपाल सोनी, निवासी जयश्री अपार्टमेंट, सेठ फुलचंद्र नगर, मंडीदीप जिला रायसेन से जब्त कर लिया गया है. पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने अपने शौक पूरे करने और दोस्तों से ली गई उधारी चुकाने के लिए यह वारदात की थी. मुख्य आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया है. फिलहाल कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया है.
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भोपाल एम्स में कितनी तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था है?
- एम्स में तीन सुरक्षा अधिकारी तैनात रहते हैं.
- चार अलग-अलग स्तर पर सिक्योरिटी गार्ड होते हैं. एक शिफ्ट में 180 गार्ड तैनात रहते हैं.
- दिनभर में 540 गार्ड की तैनाती होती है.
- एम्स के सभी गेट और ओपीडी सर्कुलेटिंग एरिया में निगरानी के लिए 120 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं.
- एक गार्ड को अमूमन 18000 रुपये का भुगतान किया जाता है.
- हर महीने सुरक्षा कंपनी को 97 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है.
- सालाना सुरक्षा व्यवस्था में 12 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च होता है.
