Bhopal: आईएएस-ईएफएस में बढ़ा टकराव, पहली बार एसीआर का मामला जबलपुर कैट पहुंचा
जबलपुर कैट
मध्य प्रदेश वन विभाग में पहली बार किसी अधिकारी की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) का विवाद केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट ) पहुंच गया है. भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी मोहन मीना ने अपनी एसीआर में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को चुनौती देते हुए कैट जबलपुर में याचिका दायर की है.
याचिका में अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव समेत एसीआर लिखने वाले सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है. मोहन मीना का आरोप है कि बिना उनका पक्ष सुने और बिना उन्हें सूचित किए उनकी एसीआर में नकारात्मक प्रविष्टि कर दी गई, जो नियमों के खिलाफ है.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट 22 सितंबर 2000 को ही स्पष्ट कर चुका है कि अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एडिशनल पीसीसीएफ ) स्तर तक के आईएफएस अधिकारियों की एसीआर केवल वन विभाग के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी ही लिखेंगे. आईएएस अधिकारी उनकी एसीआर नहीं लिख सकते.
इसके बावजूद राज्य सरकार ने जून 2024 में आदेश जारी कर कलेक्टरों को डीएफओ स्तर के वन अधिकारियों की एसीआर लिखने का अधिकार दे दिया था. इसे सुप्रीम कोर्ट ने अवमाननापूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया था. मोहन मीना ने इसी आधार पर कैट में चुनौती दी है.
विभाग में बड़ा फेरबदल भी
इस विवाद के बीच वन विभाग में बड़े प्रशासनिक बदलाव भी हुए हैं. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) सुबहरंजन धीमान के 31 अगस्त को सेवानिवृत्त होने के बाद एल. कृष्णमूर्ति अन्नागिरी को पीसीसीएफ विकास का प्रभार दिया गया है. वहीं अजय यादव को बांस मिशन का प्रबंध संचालक और अमित दुबे को ग्रीन इंडिया मिशन का सीईओ बनाया गया है.
क्यों अहम है यह मामला?
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहले ही व्यवस्था दे चुका है कि बिना अधिकारी को बताए एसीआर में की गई प्रतिकूल प्रविष्टि को पदोन्नति के लिए विचार नहीं किया जा सकता. अब कैट में मामला जाने से वन विभाग की पूरी एसीआर प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है.
यदि कैट मोहन मीना के पक्ष में फैसला देता है तो प्रदेश के सैकड़ों आईएफएस अधिकारियों की एसीआर दोबारा लिखनी पड़ सकती है. इससे आईएएस और आईएफएस के बीच रिपोर्टिंग अथॉरिटी को लेकर चल रहा टकराव और बढ़ने की आशंका है.
उल्लेखनीय है कि एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने 2025 की अचल संपत्ति रिपोर्ट में लगभग 6.5 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है. फिलहाल कैट में मामले की सुनवाई जारी है.
ये भी पढ़ें: ट्विशा मौत मामले में गिरिबाला सिंह को कल कोर्ट में पेश करेगी CBI, 4 घंटे की पूछताछ के बाद किया था गिरफ्तार