Bhopal News: दो हजार रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भोपाल के व्यापारियों ने कहा कि सरकार और बैंकों ने पिछले कई वर्षों में व्यापारियों के साथ-साथ आम ग्राहकों को भी डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित किया है. आज छोटे से छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक UPI को अपनी रोजमर्रा की व्यापारिक व्यवस्था का हिस्सा बना चुके हैं. ऐसे में अब बड़े UPI भुगतान पर शुल्क लगाए जाने से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के सामने नई व्यवहारिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं. व्यापारियों ने कहा कि इसके लिए हम वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखेंगे.
व्यापारियों का क्या कहना है?
सरकार के नए नियमों को लेकर भोपाल चैंबर आफ कमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने इस फैसले को छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बताया. उन्होंने कहा कि हम वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री को इस बारे में पत्राचार भी करेंगे क्योंकि छोटे और मध्यम व्यापारियों का फायदा बहुत कम होता है. अगर ऐसे में 0.4% चार्ज देना होगा तो इसका सीधा असर आम जनता पर भी पड़ेगा क्योंकि अगर व्यापारियों का घर ज्यादा होगा तो घुमा फिरा कर जनता से ही उसका पैसा व्यापारी वसूल करेंगे.
इस व्यवस्था का विरोध क्यों हो रहा है?
- 2000 रुपये से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट स्वीकार करने में परेशान आएगी.
- यूपीआई से पैसा लेने से व्यापारी हिचकेंगे.
- अगर पैसा लेंगे तो अतिरिक्त भार कस्टमर से भी वसूलने की कोशिश होगी.
- अगर 1 दिन में एक व्यापारी, दूसरे व्यापारी को 75,000 से ज्यादा 10 ट्रांजैक्शन करता है तो उसे 1 दिन में MDR 3000 चुकाने होंगे.
- कस्टमर से कैश में पेमेंट करने के लिए कहा जाएगा.
- व्यापारियों को शुल्क अपनी जेब से देना होगा, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से इसका असर व्यापार की लागत पर पड़ेगा.
- खासकर किराना और अन्य कम मार्जिन वाले कारोबार में इसका प्रभाव अधिक महसूस होगा.
व्यापारियों ने क्या मांग की है?
- छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को इससे बाहर रखा जाए.
- कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए विशेष छूट दी जाए.
- ग्राहकों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसका ध्यान रखा जाए.
- इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार का शुल्क लागू करने से पहले छोटे व्यापारियों, ग्राहकों और व्यापारिक संगठनों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए.
- साथ ही, किसी भी नए शुल्क को लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों से संवाद किया जाना चाहिए.
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व्यापारी का मानना है कि अगर लगातार अतिरिक्त लागत आएगी तो कुछ व्यापारी बड़े डिजिटल भुगतान के बजाय ग्राहक से नकद भुगतान या भुगतान को अलग-अलग हिस्सों में करने का आग्रह कर सकते हैं. इससे डिजिटल भुगतान की सहजता, पारदर्शिता और लेनदेन की गति प्रभावित होने की आशंका है. आज ग्राहक के पास जेब में नकदी न होने पर भी वह मोबाइल से तुरंत भुगतान कर सकता है.
