Bhopal: इन दिनों मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो का काम तेजी से चल रहा है. दूसरी तरफ भोपाल मेट्रो से जुड़ा हुआ एक विवाद अब हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. दरअसल कई साल पहले भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए सरकार द्वारा भूमि का अधिग्रहण किया गया था. लेकिन अब तक इससे प्रभावित होने वाले भूमि मालिकों को उनके हक का मुआवजा नहीं मिल पाया है. इस मामले पर हाई कोर्ट ने सुनवाई करते मध्य प्रदेश प्रशासन पर कई सवाल उठाएं है.
जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने की सुनवाई
आम नागरिकों के हितों से जुड़े इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने कहा कि अगर अगले दो हफ्तों में प्रशासन ने इस पर स्टेटस रिपोर्ट पेशन नहीं की, तो भोपाल कलेक्टर को खुद अदालत में हाजिर होकर इस मामले में जवाब देना होगा. बेंच ने इस मामले में अलगी सुनवाई की तारीख 17 अगस्त मुकर्रर की है.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि ये पूरा मामला भोपाल निवासी जाकिर अली और जाहिदा बी की तरफ से दाखिल की गई अलग-अलग याचिकाओं से जुड़ा हुआ है. याचिककर्ता ने कहा है कि मेट्रो परियोजना के निर्माण के लिए उनकी कीमती जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया, लेकिन सालों बीत जाने के बावजूद भी उन्हें अभी तक नियमानुसार मुआवजा नहीं मिला हैं.
हाई कोर्ट ने सरकार से किया सवाल
इस मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सराकर की ढिलाई पर भी सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने सवाल किया-इसके लिए याचिकाकर्ताओं को अब तक मुआवजा मिला या नहीं? अगर भुगतान रुका हुआ है, तो इसके पीछे की असली वजह क्या है? किसी की जमीन अधिग्रहित करने के बाद उसे उसे समय पर मुआवजा देना सरकार की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है. इस प्रक्रिया में गैर-जरूरी देरी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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