Bhopal Kaliasot Dam: राजधानी भोपाल में मानसून ने जहां लोगों को राहत दी है, वहीं आने वाले गर्मी के मौसम को लेकर जल संकट की चिंता भी बढ़ने लगी है. भोपाल की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. बड़े तालाब से निकलने वाला अतिरिक्त पानी कोलार और कलियासोत की दिशा में जा रहा है, लेकिन जिस कलियासोत डैम में पानी को रोककर संरक्षित किया जाना है, उसका काम अब तक अधूरा है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि डैम की क्षतिग्रस्त रिटेनिंग वॉल के हिस्से से पानी का तेज बहाव जारी है. पानी रोकने के लिए मिट्टी, मुरम और पत्थर डाले गए, लेकिन बहाव इतना तेज है कि ये अस्थायी इंतजाम भी प्रभावी साबित नहीं हो रहे.
रिटेनिंग वॉल से पानी लगातार निकल रहा
कहीं निर्माण सामग्री पड़ी है तो कहीं क्षतिग्रस्त हिस्सा दिखाई दे रहा है. बारिश के बीच निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी नजर आ रही है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मानसून में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है, तब डैम को पूरी तरह तैयार करने में देरी क्यों हुई? रिटेनिंग वॉल से पानी लगातार निकल रहा है. पानी को रोकने के लिए मिट्टी, मुरम और पत्थरों से अस्थायी इंतजाम किए गए, लेकिन तेज बहाव के सामने ये इंतजाम टिक नहीं पा रहे हैं. यदि अगले एक-दो दिनों में भोपाल और कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है तो पानी का दबाव और बढ़ सकता है. ऐसे में क्षतिग्रस्त हिस्से से पानी के बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने की आशंका चिंता बढ़ा रही है.
30 प्रतिशत काम अब भी अधूरा
कलियासोत डैम का करीब 40 साल पुराना गेट पिछले साल क्षतिग्रस्त हो गया था. इसके बाद जल संसाधन विभाग की ओर से इसे करीब छह महीने में तैयार करने का दावा किया गया था लेकिन मौजूदा स्थिति में परियोजना की प्रगति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. अब तक परियोजना पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आ रही है, जबकि निर्माण कार्य 30 प्रतिशत भी पूरा नहीं होने का दावा किया जा रहा है. बारिश के दौरान सीमेंट संबंधी निर्माण कार्य करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे में मानसून के बीच अधूरे काम को पूरा करना विभाग के सामने बड़ी चुनौती है.
स्थानीय लोगों का क्या कहना है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि डैम का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है. उनका कहना है कि अभी बारिश हो रही है, लेकिन यदि इस पानी को सुरक्षित तरीके से नहीं रोका गया तो इसका असर अगले गर्मी के मौसम में दिखाई देगा. भोपाल का बड़ा हिस्सा जलाशयों पर निर्भर है. बड़े तालाब का पानी शहर की पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है. ऐसे में बारिश के दौरान उपलब्ध पानी को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले महीनों में पानी की कमी की स्थिति बन सकती है.
स्थानीय ग्रामीणों की चिंता है कि यदि डैम का काम समय पर पूरा नहीं हुआ तो अगले साल गर्मी में भोपाल के लाखों लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है. अभी बारिश का पानी आ रहा है, लेकिन इसे रोकने की व्यवस्था पूरी नहीं है. काम बहुत धीमी गति से चल रहा है. अगर समय रहते डैम तैयार नहीं हुआ तो अगले साल गर्मी में पानी की परेशानी बढ़ सकती है.
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कलियासोत के अधूरे निर्माण पर उठे सवाल
भोपाल में फिलहाल बारिश राहत लेकर आई है. बड़ा तालाब भर रहा है, लेकिन इस पानी को सहेजने की व्यवस्था खुद सवालों के घेरे मे है. एक तरफ करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कलियासोत डैम का काम अधूरा है, दूसरी तरफ तेज बारिश के बीच पानी को रोकने के अस्थायी प्रयास भी नाकाम होते दिखाई दे रहे हैं. सवाल साफ है अगर मानसून का पानी आज सुरक्षित नहीं बचाया गया तो क्या अगले साल गर्मी में यही पानी भोपाल के लिए सबसे बड़ी जरूरत नहीं बन जाएगा.
