Bhopal News: भोपाल में मंगलवार को मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान कई संवेदनशील मामलों की सुनवाई हुई. इनमें सबसे मार्मिक मामला दो नाबालिग बच्चों का रहा, जिन्होंने अपनी मां के साथ आयोग पहुंचकर पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. बच्चों का आरोप है कि उनके पिता का पड़ोस में रहने वाली एक विवाहित महिला से लंबे समय से संबंध है. विरोध करने पर वह मां के साथ मारपीट करते हैं और उन्हें भी प्रताड़ित करते हैं. लगातार घरेलू तनाव के कारण उनकी मां मानसिक अवसाद से जूझ रही हैं और आत्महत्या का प्रयास भी कर चुकी हैं.
चार साल पुराने संबंध का लगाया आरोप
बच्चों ने आयोग को बताया कि उनके पिता का पिछले चार वर्षों से एक शादीशुदा महिला से कथित संबंध है. इस मामले की शिकायत पहले पुलिस में भी की गई थी. उस समय पिता ने शपथ पत्र देकर दोबारा ऐसा नहीं करने का भरोसा दिया था, लेकिन इसके बावजूद उनका महिला से संपर्क बना हुआ है. बच्चों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित महिला आंगनवाड़ी सहायिका है और उसने उनके पिता से आर्थिक मदद ली, जिसे अब तक वापस नहीं किया गया.
आपसी सहमति से सुलझा पारिवारिक विवाद
जनसुनवाई के दौरान पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे एक पारिवारिक विवाद का भी समाधान हुआ. आयोग ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद उन्हें समझाइश दी, जिसके बाद दोनों आपसी सहमति से साथ रहने के लिए तैयार हो गए. महिला ने अपनी शिकायत पर आगे कोई कार्रवाई नहीं करने की इच्छा जताई, जबकि पति ने भी परिवार में सामंजस्य बनाए रखने का भरोसा दिया.
फैक्ट्री हादसे के मामले में कंपनी को चेतावनी
मंडीदीप स्थित एक फैक्ट्री के वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों के नीचे दबने से कर्मचारी की मौत के मामले में उसकी पत्नी ने मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत आयोग से की. सुनवाई के दौरान कंपनी का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ. इस पर आयोग ने अगली सुनवाई में कंपनी की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने कहा कि यदि अगली तारीख पर भी कंपनी का पक्ष उपस्थित नहीं हुआ तो उसके खिलाफ वारंट जारी करने की कार्रवाई की जाएगी.
8 मामलों में दिए आवश्यक निर्देश
महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव, सदस्य साधना स्थापक और सचिव सुरेश तोमर की मौजूदगी में कुल 18 मामलों की सुनवाई हुई. इनमें घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर प्रताड़ना, पारिवारिक विवाद और मुआवजे से जुड़ी शिकायतें शामिल थीं. आयोग ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आवश्यक निर्देश जारी किए और संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई के आदेश दिए.
