Vistaar NEWS

EPS-2026: नई कर्मचारी पेंशन योजना लागू, जानें क्या रिटायरमेंट के बाद मिलेगी कर्मचारियों को पर्याप्‍त आर्थिक सुरक्षा

Representative image

सांकेतिक तस्‍वीर

EPS-2026: केंद्र सरकार ने देशभर में नई कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-2026) लागू कर दी है. इसके लागू होने के बाद निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों की रिटायरमेंट सुरक्षा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था में कई प्रक्रियात्मक सुधार किए गए हैं और कर्मचारियों को कुछ अहम राहत भी मिली है, लेकिन न्यूनतम मासिक पेंशन और हायर पेंशन जैसे लंबे समय से उठ रहे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से भविष्य में कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को लेकर सवाल बने हुए हैं.

सरकारी योगदान और कर्मचारियों की उम्मीदें

पेंशन मामलों के जानकारों के अनुसार, नई योजना में केंद्र सरकार का योगदान पहले की तरह 1.16 प्रतिशत ही रखा गया है. वहीं नियोक्ताओं का कुल योगदान बढ़ाकर 9.49 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसमें सरकार का हिस्सा भी शामिल है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पेंशन फंड की संरचना में बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अभी भी पूरा नहीं किया गया है.

एकमुश्त राशि पर बढ़ सकती है निर्भरता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में मासिक पेंशन पर्याप्त नहीं रही और सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को मुख्य रूप से ईपीएफ की एकमुश्त राशि पर निर्भर रहना पड़ा, तो यह लंबे समय के लिए चुनौती बन सकती है. उनका कहना है कि 30 से 35 वर्ष तक नौकरी करने के बाद मिलने वाली एकमुश्त राशि सीमित साबित हो सकती है, जबकि बढ़ती महंगाई और लंबी जीवन प्रत्याशा को देखते हुए रिटायरमेंट के बाद नियमित मासिक आय अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है.

नई व्यवस्था में हुए प्रमुख बदलाव

नई व्यवस्था के तहत 29 जून 2026 से योजना पूरे देश में लागू हो चुकी है. अब पेंशन योग्य वेतन का निर्धारण कर्मचारी के अंतिम 60 महीनों के औसत वेतन के आधार पर किया जाएगा. साथ ही, पेंशन अंशदान केवल 60 वर्ष की आयु तक ही स्वीकार किया जाएगा.

हालांकि, 29 जून 2026 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों पर इस योजना का असर नहीं पड़ेगा और उन्हें पहले की तरह ही पेंशन मिलती रहेगी. पुराने कानूनी विवादों का निपटारा भी ईपीएस-95 के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा.

दावों के निपटारे और निकासी में राहत

नई योजना में कुछ महत्वपूर्ण राहतें भी दी गई हैं. गंभीर बीमारी की स्थिति में कर्मचारी अपने पेंशन फंड से 25 प्रतिशत राशि छोड़कर शेष रकम निकाल सकेगा. इसके अलावा पेंशन से जुड़े दावों का निपटारा अब अधिकतम 20 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी से 12 प्रतिशत ब्याज की वसूली का प्रावधान भी किया गया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ये बदलाव प्रक्रियाओं को आसान बनाएंगे, लेकिन कर्मचारियों की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पेंशन राशि से जुड़े मूल मुद्दों पर भविष्य में और सुधार की आवश्यकता बनी हुई है.

ये भी पढे़ं- EPFO का बड़ा अपडेट! 15 जुलाई से ATM से निकाल सकेंगे PF का पैसा, ब्याज भी मिलेगा जल्द

Exit mobile version