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NTCA को भेजी वन विभाग की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा, MP में बाघों की मौत पर सवाल, कान्हा में सबसे ज्यादा 11, बांधवगढ़-पेंच में 9-9 मौतें

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बाघ सांकेतिक तस्‍वीर

MP News: मध्य प्रदेश को देश का टाइगर स्टेट कहा जाता है, लेकिन बाघों की बढ़ती आबादी के साथ उनकी मौतों का आंकड़ा भी चिंता बढ़ा रहा है. वर्ष 2025 में प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्व और वनमंडलों में बाघों की मौत के मामलों में आपसी संघर्ष, विद्युत करंट, शिकार, बीमारी, दुर्घटना और अज्ञात कारण सामने आए हैं. उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा मौतें कान्हा टाइगर रिजर्व में दर्ज हुईं, जहां 11 बाघों की जान गई. इसके बाद बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व में 9-9 मौतें दर्ज की गईं.

पिछले दिनों वन विभाग को NTCA ने तलब किया था और पूछा था कि मध्य प्रदेश में साल 2025 में बाघों के मौत का पूरा ब्यौरा दिया जाए. कैसे मौत हुई, कहां पर मौत हुई, क्या कारण रहा. इस पर वन विभाग की तरफ से NTCA को रिपोर्ट भेज दी है. जिस पर खुलासा हुआ कि मध्य प्रदेश में लगातार बाघों की मौत हो रही है. शिकार के साथ-साथ आपसी संघर्ष एक बड़ी वजह मानी जा रही है.

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मौतों का आंकड़ा

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कुल 9 मौतों हुई है. इनमें विद्युत करंट से शिकार, खाल-अंग जब्ती से जुड़े मामले, आपसी क्षेत्रीय संघर्ष, संक्रमण और अज्ञात कारण शामिल हैं. आपसी संघर्ष बाघों की मौत का प्रमुख कारण रहा. वहीं कान्हा में 11 मौतों में कई मामले territorial fight यानी बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़े बताए गए हैं. इसके अलावा विद्युत करंट और शिकार से जुड़े मामले भी सामने आए.

पेंच टाइगर रिजर्व में भी 9 बाघों की मौत दर्ज की गई. इनमें एक मामला विद्युत करंट से शिकार का है, जबकि अन्य मामलों में प्राकृतिक मौत, बीमारी, डूबना, आपसी संघर्ष, अज्ञात कारण और उपचार के दौरान मौत शामिल है. एक मामले में बाघ की प्राकृतिक मौत के बाद उसके अंग काटे जाने का भी उल्लेख है. संजय टाइगर रिजर्व में 5 बाघों की मौत हुई. इनमें एक बाघ की मौत विद्युत करंट से शिकार के कारण हुई, जबकि अन्य मामलों में आपसी संघर्ष, अज्ञात कारण और दूसरे बाघ द्वारा मारे जाने की घटनाएं शामिल हैं.

ट्रेन हादसे में हुई बाघ की मौत

टाइगर रिजर्व के बाहर भी बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं. दक्षिण बालाघाट और उमरिया वनमंडल में 3-3 मौतें दर्ज हैं. दक्षिण बालाघाट में फंदे में फंसने और विद्युत करंट समेत शिकार से जुड़े मामले सामने आए. उमरिया में एक मौत करंट से और दो मौतें आपसी संघर्ष से जुड़ी हैं. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 2 बाघों की मौत हुई, जिनमें एक प्राकृतिक और एक आपसी संघर्ष का मामला है. औबेदुल्लागंज वनमंडल में बीमारी और ट्रेन दुर्घटना से 2 बाघों की मौत दर्ज है.

उत्तर बालाघाट में खाल और अंग जब्ती से जुड़े 2 मामले दर्ज किए गए. इसके अलावा बुरहानपुर, रामपुर-भतौड़ी परियोजना मंडल बैतूल, दक्षिण सागर, दक्षिण सिवनी, सिंगरौली, पूर्व मंडला, सीहोर, उत्तर पन्ना और सतना वनमंडलों में भी एक-एक बाघ की मौत दर्ज की गई है. इन मामलों में करंट, शिकार, प्राकृतिक कारण, वाहन और ट्रेन दुर्घटना तथा अज्ञात कारण शामिल हैं.

साल 2025 में एमपी में हई 55 बाघों की मौत

राष्ट्रीय स्तर पर भी 2025 में बाघों की मौत का आंकड़ा चिंता का विषय रहा. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश में 166 और मध्य प्रदेश में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई, जो प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद एक वर्ष में प्रदेश के लिए सबसे ऊंचे आंकड़ों में शामिल है.

बाघों की मौत के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीव कॉरिडोर, विद्युत लाइनों की निगरानी, शिकार पर नियंत्रण और मानव गतिविधियों से बाघों की सुरक्षा पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. हाल में बाघों की मौत से जुड़े मामलों को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी वन्यजीव संरक्षण, विभागीय संसाधनों और पिछले वर्षों के फंड के इस्तेमाल को लेकर गंभीर रुख अपनाया है.

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