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MP की पारंपरिक कला को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान! भोपाल के बटुआ जरदोजी समेत इन 4 आर्ट को मिला GI टैग

Madhya Pradesh gi tag

मध्य प्रदेश जीआई टैग

MP GI Tag: मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला को अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने वाली है. राज्य की चार कलाओं को ज्योग्राफिकल इंडेक्स (GI) मिला है. इनमें बटुआ, बैग और दूसरे सामानों में जरदोजी के लिए प्रसिद्ध भोपाल को इस सूची में जगह मिली है. इसके अलावा खजुराहो मेटल क्राफ्ट, मालवा पेंटिंग (धार) और सारंगपुर हैंडलूम साड़ी शामिल हैं.

क्या है इन उत्पादों की पहचान?

भोपाल बटुआ जरीक्राफ्ट

खजुराहो मेटल क्राफ्ट

मालवा पेंटिंग (जिला धार)

सारंगपुर हैंडलूम साड़ी एवं फैब्रिक्स

इन्हें भी मिल चुका है GI टैग

चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी, ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा का लहसुन

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क्या है जीआई टैग?

किसी भी क्षेत्रीय उत्पाद या कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाता है. ज्योग्राफिकल इंडिकेशन ऑफ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट 1999 के तहत किसी कला या उत्पाद को जीआई टैग दिया जाता है.

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