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5 रु का फिनाइल 33,000 में… 200 LED बल्ब 60 लाख में खरीदे, ऑडिट में हुआ MP के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा

Additional Chief Secretary furious over procurement irregularities

खरीदी गड़बड़ी पर भड़के अपर मुख्‍य सचिव

MP Municipal Audit Scam: एक कहावत है कि ‘बासी बचे न कुत्ता खाए..’ कुछ इसी तरह की लोकोक्ति मध्य प्रदेश में हर समय सच होती दिखाई देती है. कभी अधिकारी एक मिटिंग में हजाराें के काजू-बदाम खा जाते हैं, तो कहीं 20 लिटर पेंट की पुताई के लिए 275 मजदूर और 150 मिस्त्री लगा दिए जाते हैं. लेकिन अब नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी के आंकड़ों ने सभी को हैरान कर दिया है.

अपर सचिव गड़बड़ी पर भड़के

दरअसल, प्रदेशभर के मुख्‍य नगर पालिका अधिकारियों की विभागीय बैठक में इस गड़बड़ी का पूरा सच सामने आया है. इस मीटिंग में अपर मुख्‍य सचिव संजय दुबे इस गड़बड़ी पर भड़क गए. विभाग ने बीते तीन साल में की गई खरीदी का ऑडिट कराया है. इस जांच को केंद्र सरकार के GeM पोर्टल पर दर्ज ब्याैरे के आधार पर किया गया. वहीं विभाग एआई टेक्नोलाॅजी की मदद के साथ सामान की अलग-अलग किमतों का पता चल पाया है.

फिनाइल की कीमतों में गड़बड़ी

किसी जगह एक लीटर फिनॉलिक डिसइन्‍फेटेंट यानी फिनाइन की कीमत 5 रुपये दर्ज की गई है, तो कहीं इस प्रोड्क्ट के लिए 33,500 रुपये का भुगतान किया गया.

200 LED बल्‍ब 60 लाख में खरीदे

वहीं एक नगर निकाय में 200 LED बल्‍ब 60 लाख में खरीदे गए. ऐसे ही 60 वॉट की LED लाइट कहीं 306 रुपये में खरीदी गई, तो भोपाल में इस लाइट की कीमत 11,800 रुपये दर्ज की गई. राजधानी में इसके लिए 3.78 लाख रुपये खर्च बताया गया.

कचरा गाड़ी की खरीदी में लाखों की गड़बड़ी

ऐसा नहीं है कि केवल छोटे प्रोड्क्ट में ही इतना बड़ा अंतर देखा गया हो. कचरा गाड़‍ियों की खरीदी में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है, जहां कुछ गाड़‍ियों के लिए 2 लाख दिए गए हैं, तो कहीं ये कचरा गाड़ी 6 लाख रुपये में खरीदी गई.

बीते तीन साल में नगरीय निकायों ने लगभग 65 करोड़ रुपये के गारबेज टिपर और डंपर खरीदे. वहीं स्‍ट्रीट लाइट के ऊपर भी करीब 49 करोड़, ऑक्टागोनल पोल पर 27 करोड़ और डिसइन्‍फेक्टेंट पर 18 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. सरकारी पैसों की इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद कई सवाल खड़े होने लगे हैं.

374 निकायों में कुल 1134 करोड़ की खरीदी

जानकारी के अनुसार, 374 निकायों में कुल 1134 करोड़ रुपये की खरीदी दर्ज की गई. पूरे मामले में बताया जा रहा है कि अगर इस खरीदी को इसके औसत मूल्‍य पर की गई होती तो करीब 250 करोड़ रुपये बचाए जा सकते थे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इस खरीदी में बड़ा अंतर देखने को मिला है.

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