‘MP का किसान केवल आपकी प्रेस विज्ञप्ति में खुशहाल’, जीतू पटवारी का CM को पत्र; कहा- खाद संकट, विशेष सत्र बुलाएं
किसानों की समस्या को लेकर जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है.
Jitu Patwari Letter To MP CM: मध्य प्रदेश में खाद और डीजल की कमी के बाद सियासत गरमा गई है. पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर किसानो की समस्याओं को लेकर लापरवाही करने का आरोप लगाया है. जीतू पटवारी ने कहा है कि खरीफ का सीजन शुरू हो गया है लेकिन प्रेदश भर का किसान खाद और डीजल के लिए परेशान है. पटवारी ने मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिखकर विशेष सत्र बुलवाने की मांग की है.
‘MP का किसान लापरवाह सरकार को माफ नहीं करता’
पटवारी ने अपने पत्र में लिखा, ‘मध्य प्रदेश का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि किसान मौसम की मार झेल लेता है, लेकिन सरकारी लापरवाही को कभी माफ नहीं करता! मेरे मध्य प्रदेश का जागरूक किसान भी सरकारी अपराधों की सूची बना रहा है. यह सूची 2028 के किसान आक्रोश वर्ष में जब सामने आएगी तो पूरी भाजपा किसानों के सामने निर्वस्त्र खड़ी नजर आएगी!’
जीतू पटवारी ने अपने पत्र में ये मांगें रखीं
- प्रदेश में खाद और डीजल संकट पर तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए.
- जिलावार खाद स्टॉक और वितरण की दैनिक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.
- सभी संभागों में किसानों के लिए आपातकालीन नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएं.
- खाद की कालाबाजारी और कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जाए.
- CM खुद मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल और ग्वालियर-चंबल के किसानों से संवाद करें.
- मुख्यमंत्री खुद वास्तविक स्थिति प्रदेश के सामने रखें.
‘सिर्फ आपकी प्रेस विज्ञप्तियों में किसान समृद्ध’
पटवारी ने आगे कहा, ‘मध्य प्रदेश का किसान आपकी प्रेस विज्ञप्तियों में समृद्ध दिखाई दे सकता है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि खेत की मेड़ पर खड़ा किसान आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है. खाद केंद्रों की कतारें, खाली हाथ लौटते किसान और बढ़ती खेती लागत आपकी सरकार के उस दावे पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न हैं, जिसमें प्रदेश को कृषि विकास का मॉडल बताया जाता है.
दुख और शर्म का विषय यह भी है कि हम उसे प्रदेश के लिए किसानों की पीड़ा पर संवाद कर रहे हैं, जो देश के कृषि मंत्री का गृह प्रदेश है! क्या कागजी किसान पुत्र शिवराज जी ने भी मप्र से मुंह मोड़ लिया है. बहरहाल, किसान इंतजार कर रहा है, खाद का भी और लाज लुटा चुकी सरकारी जवाबदेही का भी!’
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