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‘पार्टी से काम मांगा है, पद नहीं’, नितिन नवीन से मुलाकात पर नरोत्तम मिश्रा बोले – दतिया के बारे में एक-एक किस्सा सुनाया

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पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

Narottam Mishra Exclusive: दतिया उपचुनाव में भले ही कांग्रेस को जीत मिली है लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में पूर्व गृह मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा रहे हैं. भोपाल से लेकर दिल्ली तक उनके नाम की चर्चा रही है. कुछ दिनों पहले ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी. इसके बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उन्हें कोई जिम्मेदारी दे सकती है. विस्तार न्यूज के ग्रुप एडिटर ब्रजेश राजपूत ने नरोत्तम मिश्रा से बात की है. इस दौरान राजनीति समेत दूसरे विषयों पर चर्चा हुई है.

काम महत्व रखता है – नरोत्तम मिश्रा

कम बोलने के सवाल पर बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पार्टी हमारे लिए बहुत महत्व रखती है. पद भले महत्व ना रखता हो, काम महत्व रखता है. मैंने सदैव कहा है कि भारतीय जनता पार्टी में काम लगातार करते रहना है.

दतिया उपचुनाव में बीजेपी की हार पर पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि हार से आघात तो लगा था. उन्होंने कवि शिवमंगल सिंह सुमन की कविता का जिक्र करते हुए कहा कि क्या हार में, क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं, कर्म पथ पर जो मिला यह भी सही वो भी सही. संघ प्रमुख मोहन ने भी कहा है ना कि शुद्ध सात्विक प्रेम हमारे कार्य का आधार बस इतना ही चल रहा है.

नरोत्तम मिश्रा ने आंसू निकलने पर क्या कहा?

बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन रैली के दौरान आंसू छलकने की बात पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि आंसू से राजनीति से लेना-देना नहीं है. वो तो कार्यकर्ता मेरे सामने आ गया था. पुलिस के द्वारा जो लाठी चार्ज किया गया था, उसमें हमारे महत्वपूर्ण कार्यकर्ता के साथ में घटना घट गई थी और वो बोलते हुए सामने आ गया. उसके कारण से मैं द्रवित हुआ था. क्षणिक था वो भावना में बहना क्षणिक था, स्थायी नहीं था.

‘दतिया से प्रेम प्रगाढ़ रहा है’

दतिया से जुड़ाव के बारे में बीजेपी नेता ने कहा कि दतिया से दरअसल 20 साल हो गए हैं. अब वह परिवार जैसा हो गया है. दतिया मेरे लिए राजनीति का कम रिश्ता है. उनकी खुशी में, उनके गम में मैं सदैव शामिल रहा हूं. इसलिए स्वाभाविक रूप से ऐसा मुझे प्रतीत होता है कि दतिया का प्रेम मेरे प्रति मेरा प्रेम दतिया के प्रति दतिया के लोगों के प्रति अत्यधिक प्रगाढ़ है. आत्मीय रिश्ता हो गया है.

लोगों की नाराजगी को लेकर क्या बोले?

दतिया में नाराजगी के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि डेमोक्रेसी की यही खूबसूरती है. यहां कभी-कभी कोई बात रूमर के रूप में जब फैलती है और वो अगर निकल जाती है तो बाकी चीजों पर भारी पड़ जाती है. अटल जी का चुनाव एक प्याज ने प्रभावित कर दिया. जबकि ये चीज ऐसी है जो उतरती और चढ़ती रहती है. अभी बीच में आपने देखा होगा शक्कर एकदम चढ़ी तो लोग विचलित हुए और उसी बीच में किसी प्रदेश के चुनाव होते तो काम लग गया होता. ये छोटी-छोटी चीजें कभी-कभी आ जाती हैं. इसी तरह की कोई चीज दतिया में आई और ये भ्रम फैलाने में कांग्रेस सफल रही कि उनकी सरकार बनने वाली है. उसके कारण से एक वीकनेस आई और उसको फिर लोगों ने हमारे आत्मविश्वास को अहंकार से जोड़ा और यह दोनों जब क्लैंप हुए तो चुनाव का समीकरण बदल गया.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार बन रही है, सरकार बन रही है. तीन मंत्री दतिया से बनेंगे, दो मंत्री बनेंगे. ऐसा होगा, वैसा होगा. कमलनाथ मंच से बोल आए और लोगों को विश्वास हो गया और इसके ऊपर भी मैं मानता हूं कुछ ग्रह दशा भी होती है.

‘पार्टी से काम मांगा है, पद नहीं’

नितिन नवीन से मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा कि हां दतिया के बारे में मैंने उन्हें बताया था. उन्होंने तो नहीं पूछा पर मैंने पूरा किस्सा उनको बताया था. उन्होंने धैर्य से सुना था. एक-एक विषय उनको जो जिज्ञासा थी वो भी मैंने पूरी करने की कोशिश की थी और उसके बाद में पार्टी काम देगी काम करेंगे. काम ही मांगा है, पार्टी से पद तो कभी नहीं मांगा. पद की इच्छा भी नहीं, पार्टी ने बहुत दे दिया.

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि मैं हर बार गए हूं. जब-जब चुनाव हुआ है, मैं हमेशा उत्तर प्रदेश में गया हूं. बुंदेलखंड क्षेत्र से लेकर कानपुर से इटावा तक 42 सीटें मेरे पास रही हैं. पहले वाले में तो जाता रहता हूं. पार्टी कहेगी तो निश्चित रूप सेवा करना मैं अपना भाग्य समझूंगा.

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‘माई के चरणों में मरकर हटेंगे’

दतिया से दूर जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दतिया से नरोत्तम मिश्रा क्यों दूर होंगे?माई के चरणों में मर के ही हटेंगे. माई के चरण थोड़ी छोड़ना है.

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