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MP News: NGT की रोक बेअसर! नर्मदा नदी में चल रहा रेत माफिया का करोबार, बाढ़ आने पर खुली पोल

The terror of the sand mafia in the Narmada River.

नर्मदा नदी में रेत माफिया का आतंक

रिपोर्ट- अक्षय शर्मा

MP News: राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के सख्त निर्देशों और प्रतिबंधों के बावजूद रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं. प्रशासन की नाक के नीचे न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है. ताजा मामला तब सामने आया, जब नर्मदा नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण रेत माफियाओं के काले कारोबार का भंडाफोड़ हो गया.

बाढ़ में बहा ‘अवैध’ रास्ता, करोड़ों की मशीनें फंसी

मिली जानकारी के अनुसार, यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी द्वारा नर्मदा नदी की प्राकृतिक जलधारा को अवैध रूप से रोककर रेत निकालने के लिए एक अस्थायी रास्ता (रैंप) बनाया गया था. नदी के बीचों-बीच भारी पोकलेन मशीनें और दर्जनों डंपर उतारकर दिन-रात अवैध उत्खनन किया जा रहा था.

इसी बीच, ऊपरी इलाके में हुई भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और देखते ही देखते भीषण बाढ़ आ गई. तेज बहाव में कंपनी द्वारा बनाया गया अवैध रास्ता पूरी तरह बह गया. रास्ता बहने के कारण रेत निकालने के लिए नदी के बीच में उतारी गई बड़ी-बड़ी पोकलेन मशीनें और डंपर बाढ़ के पानी के बीचों-बीच फंस गए.

प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ पर उठ रहे सवाल

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और उसकी नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एनजीटी की स्पष्ट रोक के बाद भी इतना बड़ा अवैध नेटवर्क कैसे संचालित हो रहा था? जब करोड़ों की मशीनें नदी के बीच में उतारी जा रही थीं, तब खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन कहां सोया हुआ था? स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रेत माफियाओं और अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ है.

क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि या भयानक दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, तभी उसकी नींद टूटेगी? अगर बाढ़ के दौरान इन मशीनों पर मजदूर या चालक मौजूद होते, तो आज एक बड़ी जनहानि हो सकती थी. नदी की प्राकृतिक धारा को प्रभावित करने से आसपास के गांवों पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. फिलहाल, बीच नदी में फंसी मशीनें प्रशासन की नाकामी की गवाही दे रही हैं, लेकिन अभी तक इस मामले में कंपनी के खिलाफ कोई कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है.

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