Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बड़े तालाब के जलभराव क्षेत्र में कथित अवैध खनन का मामला सामने आया है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इस मामले में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनिज विभाग को मौके पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए हैं. अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान अवैध खनन या खनिजों के अवैध परिवहन की पुष्टि होने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाए.
पांच अलग-अलग स्थानों पर खनन की शिकायत
मामला रातीबड़ क्षेत्र के कलखेड़ा-मालीखेड़ी का है, जहां बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध उत्खनन किए जाने की शिकायत सामने आई थी. एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की. सुनवाई के दौरान जानकारी सामने आई कि तालाब के जलभराव क्षेत्र के आसपास पांच अलग-अलग स्थानों पर पत्थर और गिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है.
डंपरों की आवाजाही से भूजल पर असर की आशंका
क्षेत्र में खनिजों को ले जाने के लिए डंपरों की आवाजाही भी जारी रहने की बात सामने आई है. इससे बड़े तालाब के आसपास के पर्यावरण और भूजल पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है. तालाब का कैचमेंट क्षेत्र जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, ऐसे में यहां होने वाली गतिविधियों की जांच जरूरी मानी जा रही है.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनिज विभाग करेंगे जांच
एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनिज विभाग के अधिकारियों को संबंधित स्थलों का निरीक्षण करने और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. अधिकरण ने कहा है कि कार्रवाई केवल अवैध उत्खनन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यदि निकाले गए खनिजों का परिवहन भी नियमों के विरुद्ध पाया जाता है, तो उस पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए.
तीन महीने में पेश करनी होगी रिपोर्ट
अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को तीन महीने के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है. अब जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में खनन संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और इस मामले में किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है.
