MP News: कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इसमें व्यापक और परिणामकारी सुधार की मांग की है. उन्होंने विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि EOW शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता नहीं बरत रहा है. शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई की जानकारी नहीं दी जाती और मामलों के निपटारे में कई-कई वर्षों की देरी हो रही है.
विधानसभा के आंकड़ो पर उठाए सवाल
ग्रेवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार वर्ष 2020 से जून 2026 तक EOW को 23,261 शिकायतें प्राप्त हुईं. इनमें से 3,018 शिकायतें दर्ज की गईं और 756 शिकायतें नस्तीबद्ध कर दी गईं. उन्होंने सवाल उठाया कि शेष 19,487 शिकायतों का क्या हुआ, इसका सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उनके अनुसार इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों की स्थिति अस्पष्ट रहना गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है.
शिकायतकर्ताओं को नहीं मिलती कार्रवाई की जानकारी
उन्होंने कहा कि उन्होंने शिकायत दर्ज होने, अपराध पंजीबद्ध होने की वास्तविक तिथि तथा शिकायतकर्ता को इसकी सूचना देने की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी मांगी थी, लेकिन सरकार ने इसका संतोषजनक उत्तर नहीं दिया. ग्रेवाल का आरोप है कि शिकायतकर्ता को यह तक नहीं बताया जाता कि उसकी शिकायत दर्ज हुई है, नस्तीबद्ध कर दी गई है या उस पर आगे क्या कार्रवाई की गई है.
जांच और अभियोजन की धीमी रफ्तार पर सवाल
ग्रेवाल ने दावा किया कि वर्ष 2020 से जून 2026 तक दर्ज 3,018 शिकायतों में से केवल 258 मामलों में अपराध दर्ज किए गए. इनमें भी पिछले साढ़े छह वर्षों में सिर्फ 9 मामलों में न्यायालय में चालान पेश किया गया. उन्होंने इसे जांच और अभियोजन की बेहद धीमी प्रक्रिया का उदाहरण बताते हुए कहा कि एक मामले में 16 मार्च 2020 को शिकायत दर्ज होने के बाद 21 अप्रैल 2026 को अपराध दर्ज किया गया. वहीं, 15 सितंबर 2020 को दर्ज एक अन्य अपराध में 12 अगस्त 2025 को चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया.
दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि शिकायत क्रमांक 293/2023 से संबंधित दस्तावेज और नोटशीट की प्रतियां मांगने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गईं. उन्होंने रतलाम नगर निगम की सीवरेज योजना में कथित 100 करोड़ रुपये की अनियमितता से जुड़ी पूर्व विधायक पारस सकलेचा की शिकायत का भी उल्लेख किया. उनका आरोप है कि इस शिकायत को उसी विभाग के पास कार्रवाई के लिए भेज दिया गया, जिसके खिलाफ शिकायत की गई थी.
मुख्यमंत्री से की समयबद्ध सुधार की मांग
प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों के अधूरे उत्तर देना और EOW के माध्यम से न्याय मिलने में 8 से 10 वर्ष तक का समय लगना मुख्यमंत्री की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से EOW की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार करने, जांच को समयबद्ध बनाने तथा प्रत्येक शिकायतकर्ता को हर तीन महीने में उसकी शिकायत पर हुई कार्रवाई की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू करने की मांग की.
