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एक साल में MP में हुए 1 लाख से अधिक सड़क हादसे, सबसे ज्यादा युवाओं ने गंवाई जान, सागर नंबर वन, टाॅप 3 में इंदौर-भोपाल

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सांकेतिक तस्‍वीर

MP News: मध्‍य प्रदेश में सड़क हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं. डायल 108 एंबुलेंस सेवा की हाल ही में जारी हुई रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में एक साल में 1,03,294 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई है. इस रिपोर्ट में चिंता की बात यह रही कि हादसों का शिकार हाेने वालों में 16 से 30 साल के युवा सबसे ज्यादा शामिल है. इसमें 61 प्रतिशत हिस्‍सेदारी युवाओं की है.

108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि हेलमेट और सीट बेल्‍ट का उपयोग नहीं करने के कारण अधिकांश लोगों को गंभीर चोंटे आई हैं. उन्‍होंने लोगों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने और ओवर स्‍पीडिंग से बचने के लिए सभी से अपील की है.

रिपोर्ट के मुता‍बिक, प्रदेश में सबसे ज्यादा सड़क हादसे सागर जिले में दर्ज किए गए है जहां इसकी संख्‍या 6061 है. वहीं इंदौर में 4853 और भोपाल में 4546 दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं. इसके साथ ही छिंदवाड़ा, जबलपुर, धार और रीवा में भी तीन हजार से ज्यादा हादसे दर्ज किए गए हैं.

युवाओं की संख्‍या ज्यादा

उम्र के आधार पर किए गए विश्लेषण से पता चला है कि सड़क हादसों का सबसे ज्यादा शिकार 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा हो रहे हैं. कुल दुर्घटनाओं में इस आयु वर्ग की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत दर्ज की गई है. इसके बाद 31 से 45 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत, 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग की 9 प्रतिशत, 0 से 15 वर्ष के बच्चों की 4 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की 3 प्रतिशत रही.

मई में सबसे ज्यादा हादसे दर्ज

महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में मई का महीना सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से सबसे अधिक चिंताजनक रहा. इस दौरान 12,047 हादसे दर्ज किए गए. जून और जुलाई में दुर्घटनाओं की संख्या में कुछ कमी देखने को मिली, लेकिन अगस्त से फिर मामलों में बढ़ोतरी शुरू हो गई. वहीं, त्योहारों के मौसम में अक्टूबर और नवंबर के दौरान भी दुर्घटनाओं के आंकड़ों में उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया.

लापरवाही बन रही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना, यातायात नियमों की अनदेखी, सड़कों पर मौजूद ब्लैक स्पॉट और गड्ढे, वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना तथा लापरवाही और स्टंटबाजी जैसी प्रवृत्तियां हादसों की प्रमुख वजह बन रही हैं.

ओवर स्पीडिंग पर लगाम से घट सकते हैं हादसे

भोपाल के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी जितेंद्र शर्मा का कहना है कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं के पीछे ओवर स्पीडिंग सबसे बड़ा कारण है. उनका मानना है कि यदि चालक निर्धारित गति सीमा का गंभीरता से पालन करें तो सड़क हादसों में करीब 60 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है.

इन जिलों में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं

प्रदेश में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं सागर जिले में दर्ज की गईं, जहां 6,061 हादसे हुए. इसके बाद इंदौर में 4,853, भोपाल में 4,546, छिंदवाड़ा में 3,406, जबलपुर में 3,398, धार में 3,363, रीवा में 3,289, सतना में 2,912, विदिशा में 2,786 और खरगोन में 2,748 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं.

भोपाल की घटना ने फिर बढ़ाई चिंता

हाल ही में राजधानी भोपाल में हुई एक दर्दनाक घटना ने सड़क सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी. तेज रफ्तार बाइक डिवाइडर पर लगे पेड़ से टकरा गई, जिससे दो मेडिकल छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई. इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है.

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