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एमपी का मानोरा ‘मिनी जगन्नाथ पूरी’, मंदिर में हर साल लगती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, भक्त के वचन निभाते है भगवान जगदीश

Vidisha Rath Yatra

विदि‍शा रथ यात्रा

MP News: विदिशा जिले की ग्यारसपुर तहसील का छोटा-सा गांव मानोरा आज पूरे प्रदेश में ‘मिनी जगन्नाथ पुरी’ के नाम से प्रसिद्ध है. यहां करीब 300 वर्षों से भगवान जगदीश स्वामी की ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली जाती है. धार्मिक मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने परम भक्त मानकचंद तरफदार को दिया गया वचन निभाने स्वयं मानोरा पधारते हैं. यही आस्था हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को इस पावन धाम तक खींच लाती है.

मानोरा पहुंचने की अनूठी धार्मिक मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिस समय भगवान जगदीश स्वामी मानोरा के लिए प्रस्थान करते हैं, उसी समय पुरी में भगवान का रथ कुछ क्षणों के लिए ठहर जाता है. वहां के पंडा श्रद्धालुओं को घोषणा कर बताते हैं कि भगवान अपने परम भक्त के गांव मानोरा पधार गए हैं. यही कारण है कि मानोरा को श्रद्धालु ‘मिनी जगन्नाथ पुरी’ के रूप में विशेष सम्मान देते हैं.

300 वर्ष पुरानी रथयात्रा की गौरवशाली परंपरा

करीब 300 वर्ष पुराने श्री जगदीश मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा विराजमान हैं. रथयात्रा के दिन भगवान को भव्य रथ पर विराजित किया जाता है और हजारों श्रद्धालु अपने हाथों से रथ खींचकर स्वयं को धन्य मानते हैं. गांव के सभी समाजों और समुदायों के लोग मिलकर इस धार्मिक आयोजन को भाईचारे, श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न कराते हैं.

दंडवत यात्रा और ‘अटका’ प्रसाद की विशेष परंपरा

मानोरा की सबसे अनूठी परंपराओं में दंडवत यात्रा भी शामिल है. अनेक श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर दूर से दंडवत करते हुए यहां पहुंचते हैं. मंदिर में भगवान को विशेष रूप से मिट्टी की सात हंडियों में तैयार किए गए मीठे पीले भात, जिसे ‘अटका’ कहा जाता है, का भोग लगाया जाता है. इसके बाद यही प्रसाद हजारों श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है.

भक्त को दिए वचन की निभाई जा रही परंपरा

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, भक्त मानकचंद तरफदार और उनकी पत्नी पद्मावती की कठिन दंडवत यात्रा से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें हर वर्ष मानोरा आकर दर्शन देने का वचन दिया था. तभी से यह परंपरा आज तक निरंतर चली आ रही है. स्थानीय मान्यता है कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश पुरी नहीं जा पाते, उन्हें मानोरा में भगवान की रथयात्रा के दर्शन करने से समान पुण्य की प्राप्ति होती है.

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए व्यापक व्यवस्थाएं

रथयात्रा के दौरान छोटा-सा मानोरा गांव एक विशाल तीर्थ में बदल जाता है. गांव का लगभग हर घर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत, सत्कार और सेवा में जुट जाता है. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा पुलिस बल, सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, चिकित्सा, पेयजल, बिजली और यातायात की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं.

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