Misses Shahnawaz Son Wedding: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन के बेटे अरबाज की शादी थी. जिसमें मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी शामिल होने वाली थीं, लेकिन किसी कारणवश वे बारात में शामिल नहीं हो पाई. अब उन्होंने शाहनवाज से लेकर उनके बेटे अरबाज से जुड़ा एक इमोशनली कहानी शेयर की है. जिसे पढ़कर शाहनवाज खुद भावुक हो गए.
उमा भारती ने सोशल मीडिया पर लिखा, शाहनवाज हुसैन बेटे अरबाज की शादी के लिए जब वृंदावन में विवाह का निमंत्रण-पत्र देने आए थे. इस दौरान हमें शाहनवाज की पहली मुलाकात से लेकर शादी तक की पूरी कहानी याद आ गई. 1993 दिसंबर तक जगत प्रसाद नड्डा जी युवा मोर्चे के अध्यक्ष थे उनके बाद मैं बनी. शाहनवाज, नड्डा की टीम में सदस्य की हैसियत से थे.
1. शाहनवाज हुसैन जी जब वृंदावन में अपने बेटे अरबाज के विवाह का निमंत्रण-पत्र देने आए थे तब शाहनवाज जी से मेरी पहली मुलाकात से लेकर अरबाज की शादी के निमंत्रण तक की पूरी कहानी याद आ गई। 2. 1993 दिसंबर तक जगत प्रसाद नड्डा जी युवा मोर्चे के अध्यक्ष थे उनके बाद मैं बनी। 3. शाहनवाज जी नड्डा जी की टीम में सदस्य की हैसियत से थे, उन्हें आशंका थी कि मैं नई टीम में उनको नहीं रखूंगी क्योंकि अयोध्या आंदोलन में इतनी सक्रिय भागीदारी के बाद मेरे जैसे लोगों की वामपंथियों के द्वारा ऐसी छवि प्रस्तुत कर दी गई कि हम मुस्लिम समाज के दुश्मन हैं। 4. किंतु शाहनवाज जी की अत्यधिक सक्रियता को देखकर पहली बार कार्यालय प्रभारी बने फिर राष्ट्रीय मंत्री बने फिर लोकसभा का चुनाव लड़े और 32 वर्ष की आयु में अटल जी की सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर बने। 5. रेनू शर्मा के बारे में उन्होंने सबसे पहले मुझे ही बताया, रेनू एवं शाहनवाज दोनों अपनी धर्म का पालन करें और विवाह करें, मेरे इस सुझाव के बाद दोनों ने विवाह किया फिर दोनों के परिवारों ने उनको अपना लिया, फिर अरबाज का जन्म हुआ तो मेरे निवास पर युवा मोर्चे के सदस्यों ने खुशी मनाई इसमें साहब सिंह वर्मा भी शामिल हुए, फिर तो शाहनवाज तरक्की करते गए, बच्चे बड़े होते गए, उच्च शिक्षा प्राप्त किये। रेनू एवं शाहनवाज के संबंधों की मिठास कभी कम नहीं हुई। 6. अपने बेटे की शादी का निमंत्रण पत्र लेकर शाहनवाज जी वृंदावन आए और दिनांक 26 तारीख को शाम को अरबाज के निकाह में मुझे फूफी की हैसियत से बैठना था। मैं केदारनाथ जी से 25 तारीख सुबह वृंदावन आई, केदारनाथ जी में माईनस 3 डिग्री तापमान था वृंदावन में अत्यधिक गर्मी, फिर तो मैं 26 तारीख को दिल्ली जा ही नहीं सकी इसका मुझे जीवन भर अफसोस रहेगा। 7. मैं शादी में नहीं जाती किंतु अरबाज के निकाह में मुझे रहना था क्योंकि मेरी जिंदगी की यात्रा में शाहनवाज का साथ 32 साल का है, मेरी नजर में अभी भी वह बहुत छोटा है और मेरा भाई है, अब उसके बेटे का निकाह था, नहीं जा पाई। 8. प्यारी अफशां एवं चि. अरबाज तथा रेनू एवं शाहनवाज सबकी खुशहाली के लिए मैं वृंदावन में बांके बिहारी जी से प्रार्थना करती हूं। @ShahnawazBJP
— Uma Bharti (@umasribharti) October 29, 2026
32 साल की उम्र में बने कैबिनेट मंत्री
शाहनवाज को आशंका थी कि मैं नई टीम में उनको नहीं रखूंगी क्योंकि अयोध्या आंदोलन में इतनी सक्रिय भागीदारी के बाद मेरे जैसे लोगों की वामपंथियों के द्वारा ऐसी छवि प्रस्तुत कर दी गई कि हम मुस्लिम समाज के दुश्मन हैं. शाहनवाज की अत्यधिक सक्रियता को देखकर पहली बार कार्यालय प्रभारी बनाया फिर राष्ट्रीय मंत्री बने फिर लोकसभा का चुनाव लड़े और 32 वर्ष की आयु में अटल जी की सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर बने.
रेनू शर्मा के बारे में सबसे पहले बताया
उमा भारती ने बताया कि रेनू शर्मा के बारे में शाहनवाज ने सबसे पहले मुझे ही बताया, रेनू एवं शाहनवाज दोनों अपने धर्म का पालन करें और विवाह करें, मेरे इस सुझाव के बाद दोनों ने विवाह किया फिर दोनों के परिवारों ने उनको अपना लिया. अरबाज का जब जन्म हुआ तो मेरे निवास पर युवा मोर्चे के सदस्यों ने खुशी मनाई, इसमें साहब सिंह वर्मा भी शामिल हुए. इसके बाद शाहनवाज तरक्की करते गए, बच्चे बड़े होते गए, उच्च शिक्षा प्राप्त किए. रेनू एवं शाहनवाज के संबंधों की मिठास कभी कम नहीं हुई.
फूफी की हैसियत से शामिल होना था
उन्होंने आगे बताया कि शाहनवाज अपने बेटे की शादी का निमंत्रण पत्र लेकर वृंदावन आए और 26 अक्टूबर की शाम को अरबाज के निकाह में मुझे फूफी की हैसियत से बैठना था. मैं केदारनाथ जी से 25 तारीख सुबह वृंदावन आई, केदारनाथ जी में माईनस 3 डिग्री तापमान था वृंदावन में अत्यधिक गर्मी, फिर तो मैं 26 तारीख को दिल्ली जा ही नहीं सकी इसका मुझे जीवन भर अफसोस रहेगा.
मैं शादी में नहीं जाती किंतु अरबाज के निकाह में मुझे रहना था क्योंकि मेरी जिंदगी की यात्रा में शाहनवाज का साथ 32 साल का है, मेरी नजर में अभी भी वह बहुत छोटा है और मेरा भाई है, अब उसके बेटे का निकाह था, नहीं जा पाई. प्यारी अफशां एवं चि. अरबाज तथा रेनू एवं शाहनवाज सबकी खुशहाली के लिए मैं वृंदावन में बांके बिहारी जी से प्रार्थना करती हूं.
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भावुक हुए शाहनवाज
जब इस कहानी को शाहनबाज पढ़े तो खुद भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि 32 वर्षों का हमारा साथ, आपका स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद हमारे जीवन की पूंजी है. बेटे की शादी में आपकी कमी बहुत खली, लेकिन विश्वास भी है कि दीदी का आशीर्वाद हमेशा साथ रहेगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जब भी वे दिल्ली आएं, तो आशीर्वाद देने उनके घर जरूर आएं. आप मेरी दीदी ही नहीं, अभिभावक हैं.
