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बक्सवाहा के जंगल फिर निशाने पर, पेड़ों की गिनती में गड़बड़ी के बीच खदान लीज का विवाद

जंगलों पर संकट

जंगलों पर संकट

Buxwaha Forest: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का बक्सवाहा एक फिर अपने जंगल और पेड़ों को लेकर चर्चा में आ गया है. लौह अयस्क खदान को लीज की मंजूरी मिलने के बाद हजारों पेड़ों की कटाई की तैयारी हो चुकी है. पहले इन्हीं जंगलों की कटाई पर हाई कोर्ट और एनजीटी ने रोक लगाई थी. उस समय पेड़ों की कटाई के लिए मंजूरी हीरा खनन के लिए दी गई थी. यही वजह है कि इस तरह के फैसले के अब कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं.

बक्‍वाहा में देश के सबसे बड़े हीरा भंडार के लिए 382.131 हेक्टेयर जंगल में करीब 2 लाख पेड़ काटने का आदेश दिया गया था. स्‍थानीय लोगों के विरोध के कारण हाईकोर्ट ने इस तरह के फैसले पर रोक लगा दी थी.

अध‍िकार‍ियों ने ही कर दी पेड़ों की गिनती में गड़बड़ी

हाल ही सरकार की तरफ से सन फ्लैक्‍स आयरन एंड स्टील कंपनी ने यहां की लीज की मांग की है. इसके लिए बाकायदा आवेदन भी द‍िया गया है. इस आवेदन के बाद वन विभाग ने 98 हेक्टेयर के जंगलों में मौजूद पेड़ों की गिनती की है. लेकिन इस गिनती में बड़ा झोल पाया गया है. कई पेड़ों पर वन व‍िभाग की तरफ से नंबर ही नहीं लिखे गए हैं. इसके साथ ही जो मापदंड तय किया गया था उसको भी फॉलो नहीं किया गया है.

वन विभाग ने जंगल में मौजूद बड़ी संख्या में तेंदू, बेल, करोंदा, बहेड़ा, केम समेत कई अन्य पेड़ों की गिनती ही नहीं की है.

ग्रामीणों की मानें तो जिस समय यह गिनती पूरी की जा रही थी. उस समय वन विभाग के अधिकारी मौजूद ही नहीं थे. यह पूरी गणना चौकीदारों ने की है. यही वजह है कि इस तरह की लापरवाही की गई है. जहां एक समय पेड़ों की गिनती 500 से ज्यादा थी वन विभाग ने अपनी लिस्ट में 187 कर दी है.  

हीरा परियोजना पर लगी है रोक

हीरा खनन परियोजना के संबंध में इस समय एनजीटी के साथ साथ हाईकोर्ट ने भी रोक लगा रखी है. इसपर रोक लगाने के पीछे की वजह केन बेतवा परियोजना और टाइगर रिजर्व के साथ-साथ ग्रामीणों का विरोध भी था. उस समय बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था. इसी के बाद रोक लगाने का फैसला लिया गया था.

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