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MP News: PCCF शुभरंजन सेन के खिलाफ अभियान हुआ तेज, RTI एक्टिविस्ट के बाद पूर्व IFS ने CM को लिखा पत्र

Shubharanjan Sen (File Photo)

शुभरंजन सेन(File Photo)

MP News: भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी आजाद सिंह डवास ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 1987 बैच के आईएफएस अधिकारी शुभरंजन सेन को वन बल प्रमुख बनाए जाने के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है. हालांकि बल प्रमुख को लेकर पिछले दिनों आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और बल प्रमुख की जिम्मेदारी को संभालने वाले अधिकारी के संदर्भ में अपनी बात कही थी.

‘सेन को आवश्यक ट्रेनिंग नहीं मिली है’

डवास ने अपने पत्र में लिखा है कि वन विभाग में सिस्टम परिवर्तन अभियान के तहत यह आवश्यक है कि वन बल प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पद पर ऐसे अधिकारी की नियुक्ति हो, जिसे मैदानी कार्यों और विभागीय दायित्वों का व्यापक अनुभव हो. उन्होंने कहा कि वन मंडलाधिकारी (क्षेत्रीय), वन संरक्षक (क्षेत्रीय) और मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय) जैसे पदों को वन सेवा के सबसे महत्वपूर्ण दायित्व माना जाता है, लेकिन शुभरंजन सेन इन तीनों पदों पर कभी पदस्थ नहीं रहे हैं. पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सेन ने वन मंडलाधिकारी के रूप में उत्पादन एवं सामाजिक वानिकी जैसे दायित्वों का निर्वहन नहीं किया है. साथ ही, उन्हें उप वन मंडलाधिकारी के रूप में आवश्यक ट्रेनिंग भी प्राप्त नहीं हुई, जो कि भारतीय वन सेवा अधिकारियों के सेवा इतिहास में एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है.

अधिकारी के कामकाज के आधार पर मिले जिम्मेदारी

डवास ने लिखा कि सेवा इतिहास के अनुसार, डीपीसी (Departmental Promotion Committee) के दौरान यह देखा जाना चाहिए था कि अधिकारी ने सेवा में आने से लेकर अब तक कौन-कौन से दायित्व निभाए हैं. उन्होंने तर्क दिया कि वन विभाग के मैदानी कार्यों, विशेषकर वन्यप्राणी प्रबंधन को छोड़कर अन्य क्षेत्रीय जिम्मेदारियों का अनुभव न होने के कारण सेन वन बल प्रमुख जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं.

विरोध के बाद सरकार के फैसले का इंतजार

उन्होंने आग्रह किया कि शुभरंजन सेन की नियुक्ति को लेकर पुनर्विचार किया जाए और वन बल प्रमुख जैसे पद पर ऐसी नियुक्ति हो, जो विभागीय परंपराओं, अनुभव और प्रशासनिक संतुलन के अनुरूप हो. यह मामला अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है.

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