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7000 करोड़ खर्च लेकिन नहीं बन पाई स्मार्ट सिटी, केंद्र और राज्य का बजट खत्म, भोपाल सहित 7 जिलों में परियोजनाओं का काम अधूरा

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भोपाल स्मार्ट सिटी

MP News: मध्य प्रदेश में 7 हजार करोड़ खर्च होने के बाद भी स्मार्ट सिटी तैयार नहीं हो पाई है. इस परियोजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने ही पर्याप्त बजट दिया, लेकिन इसके बाद भी भोपाल सहित सात जिलों में परियोजनाओं का काम अधूरा पड़ा हुआ है. खास तौर पर भोपाल में स्मार्ट सिटी का काम कई चरण में पूरा नहीं हो पाया है, जबकि राज्य सरकार ने स्मार्ट सिटी के लिए काफी ज्यादा बजट भी खर्च किया था. केंद्र सरकार से भी जमकर फंड आया फिर भी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई.

बजट खत्म, लेकिन काम अधूरा

स्मार्ट सिटी योजना के तहत भोपाल में कई इलाकों में काम चल रहा है. इसके अलावा स्मार्ट सिटी में कॉलोनी दुकान और मल्टीलेयर के साथ मल्टीपरपज एरिया डेवलप नहीं हो पाया है. उसके पीछे की वजह है कि केंद्र की तरफ से पैसा जरूर आया लेकिन राज्य सरकार अपने हिस्से का फंड समय पर नहीं दे पाई. बाद में टेंडर जारी हुए काम आधा अधूरा हुआ लेकिन पेमेंट पूरा हो गया. 11 साल पूरे होने के बाद भी भोपाल सहित जिन जिलों में स्मार्ट सिटी का काम शुरू हुआ था वहां पर धरातल पर कोई विशेष और सफलता पूर्ण परियोजना पूरी नहीं हुई है. साल 2015 में मध्य प्रदेश के सात शहरों को शामिल किया गया था, जिसमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, सतना और उज्जैन को आधुनिक बुनियादी ढांचे और पर्यावरण के साथ-साथ बेहतर जीवन के लिए चुना गया था.

भोपाल की हरियाली खत्म, प्रोजेक्ट अधूरे

भोपाल में साल 2015 में भोपाल की टीटीनगर एरिया को चुना गया था. यहां पर सरकारी आवास हटाकर हरियाली को नष्ट किया गया. इसके बाद यहां पर स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट शुरू हुआ. साउथ टीटी नगर में 333 एकड़ जमीन पर पीपीपी मोड पर विकास करने का दावा हुआ था. अब स्थिति यह बनी की जमीन बेचकर 6644 करोड़ की आमदनी होगी. डेवलपमेंट कॉस्ट 344 करोड़ आएगा, लेकिन हकीकत यह है कि पूरा स्मार्ट सिटी का एरिया उजड़ा और वीराना पड़ा हुआ है और यहां पर दुकान भी बंद पड़ी हुई है.

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स्मार्ट सिटी पर मध्य प्रदेश में कितना खर्च

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