MP News: रबी सीजन की सबसे बड़ी प्रशासनिक परीक्षा गेहूं उपार्जन को लेकर सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि किसान को केंद्रों पर किसी भी प्रकार की परेशानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. CM मोहन यादव ने जिला कलेक्टरों से दो टूक कहा कि पंजीकृत किसानों का सत्यापन, बारदानों की उपलब्धता और समय पर भुगतान हर हाल में सुनिश्चित हो. “परफॉर्मेंस और परिणाम देने वाले ही मैदान में रहेंगे,” इस सख्त टिप्पणी के साथ मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक जवाबदेही तय कर दी.
सीएम ने समाधान पर ध्यान देने के लिए कहा
राज्य स्तरीय समीक्षा के बाद कलेक्टरों से वर्चुअल संवाद में मुख्यमंत्री ने खरीदी का शेड्यूल स्पष्ट किया. इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 16 मार्च से 5 मई तक, जबकि जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल और सागर संभाग में 23 मार्च से 12 मई तक उपार्जन होगा. किसानों के पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्र समय पर स्थापित हों, तौल-कांटे, पेयजल, छाया और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध रहें और जिला उपार्जन समितियां नियमित बैठक कर समस्याओं का त्वरित समाधान करें.
“किसान को इंतजार नहीं, समय पर भुगतान चाहिए”
पंजीकृत किसानों का शत-प्रतिशत सत्यापन, बारदानों की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स की अग्रिम व्यवस्था, अद्यतन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराना होगा.
खरीदी के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अनुशासन पर भी सख्ती दिखाई. उन्होंने साफ कहा कि कार्यालयीन समय का पालन हर हाल में हो. हाल ही में मंत्रालय में आकस्मिक निरीक्षण कराया गया था, अब जिलों में भी इसी तरह की जांच होगी। यदि समयपालन में सुधार नहीं हुआ तो छह दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की चेतावनी भी दी गई. संदेश स्पष्ट है—सुविधाएं अधिकार हैं, लेकिन जवाबदेही अनिवार्य है.
मुख्यमंत्री ने परीक्षा सत्र को देखते हुए कलेक्टरों को स्कूलों, छात्रावासों और विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए. परीक्षाओं का संचालन और आगामी सत्रारंभ निर्विघ्न हो, यह सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगीय
“परफॉर्मेंस नहीं तो पद नहीं”
- संकल्प से समाधान अभियान के 40 लाख आवेदन निराकृत
- 16 मार्च तक जिला स्तरीय शिविर
- परिणाम देने वाले अधिकारी ही रहेंगे जिम्मेदारी में रहेंगे.
सीएम ने अपनाया कड़ा रुख
सोशल मीडिया के दौर में भ्रामक सूचनाओं पर भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शासन और व्यवस्था से जुड़ी किसी भी मिथ्या या भ्रम फैलाने वाली जानकारी का जिला स्तर पर तत्काल प्रभावी खंडन किया जाए. त्वरित और तथ्यात्मक प्रतिक्रिया को प्रशासनिक संस्कृति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया.
खाड़ी देशों में बनी परिस्थितियों को देखते हुए वहां रह रहे प्रदेश के विद्यार्थियों और नागरिकों के परिवारों से सतत संपर्क रखने के निर्देश भी दिए गए . नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और वल्लभ भवन मंत्रालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है. जिला कलेक्टरों को ऐसे परिवारों से निरंतर समन्वय बनाए रखने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता दी जा सके.
“अनुशासन, संवाद और संवेदनशीलता—तीन मोर्चों पर प्रशासन”
- खाड़ी देशों में रह रहे नागरिकों के परिवारों से सतत संपर्क
- वीसी सेटअप से पंचायत स्तर तक संवाद
- परीक्षा सत्र में संस्थानों का आकस्मिक निरीक्षण
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किसानों को राहत, प्रशासन पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष बताते हुए जिलों में लगने वाले पारंपरिक मेलों में कृषि और पशुपालन नवाचारों की प्रदर्शनी लगाने के निर्देश दिए. साथ ही होम-स्टे को प्रोत्साहन देने की बात भी कही, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिले.
सरकार का संकेत साफ है. किसानों को राहत, प्रशासन में अनुशासन और जनसंपर्क में संवेदनशीलता. गेहूं खरीदी के साथ ही प्रशासनिक मशीनरी की कार्यक्षमता की भी परीक्षा शुरू हो चुकी है.
