Bhopal News: राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लगातार बद से बदतर होती जा रही हैं. एक ओर निजी अस्पताल खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए फर्जी तरीके से संचालन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर शासकीय अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है. इन सभी अव्यवस्थाओं के बीच सबसे चिंताजनक स्थिति स्वयं सीएमएचओ कार्यालय की है, जहां अनियमितताओं का अंबार लगा हुआ है.
जारी आदेश पर NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष का विरोध
एनएसयूआई(NSUI) प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मंगलवार को सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा द्वारा जारी एक आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज करते हुए कहा, “सीएमएचओ कार्यालय में वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य कर्मचारियों से बाबूगिरी करवाई जा रही है. पहले से ही कार्यालय में फार्मासिस्ट एवं नेत्र सहायक जैसे तकनीकी पदों पर पदस्थ कर्मचारियों को प्रशासनिक एवं संवेदनशील शाखाओं का प्रभारी बना दिया गया है”.
रवि परमार ने क्या आरोप लगाया?
रवि परमार ने कहा कि वर्तमान में एक फार्मासिस्ट को नर्सिंग होम शाखा का प्रभारी बनाया गया है, जिन्हें न तो प्रशासनिक अनुभव है और न ही मूलभूत कार्यालयी कार्यों की समुचित जानकारी. स्थिति यह है कि संबंधित कर्मचारी को ठीक से टाइपिंग तक नहीं आती, फिर भी उनसे गंभीर फाइलों एवं लाइसेंस संबंधी कार्य करवाए जा रहे हैं. इसी प्रकार एक नेत्र सहायक को पीसीपीएनडीटी शाखा जैसे अत्यंत संवेदनशील विभाग का प्रभारी बना दिया गया है, जो सीधे-सीधे कानून और नियमों का मज़ाक है.
रवि परमार ने आगे कहा कि अब ताज़ा मामला और भी चिंताजनक है, जहां जेपी अस्पताल में पदस्थ एक ड्रेसर को सीएमएचओ कार्यालय में बाबूगिरी का कार्य सौंपा जा रहा है. वर्षों तक मरीजों की सेवा में लगे कर्मचारी को अचानक प्रशासनिक कार्य सौंपना न केवल हास्यास्पद है बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ खुला खिलवाड़ भी है.
डॉ. मनीष शर्मा लगातार नए-नए प्रयोग कर रहे हैं
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर ने आरोप लगाया कि डॉ. मनीष शर्मा लगातार “नए-नए प्रयोग कर रहे हैं, जिनका सीधा दुष्परिणाम भोपाल जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है. योग्य कर्मचारियों को दरकिनार कर अयोग्य एवं अप्रशिक्षित कर्मचारियों से महत्वपूर्ण कार्य करवाना भ्रष्टाचार, मनमानी और प्रशासनिक अराजकता को बढ़ावा दे रहा है”.
अक्षय तोमर ने क्या चेतावनी दी है?
अक्षय तोमर ने चेतावनी दी है कि शीघ्र ही ड्रेसर, फार्मासिस्ट और नेत्र सहायक जैसे कर्मचारियों से योग्यता के अनुरूप अन्य कार्य करवाया जा रहा. यदि अगर तत्काल योग्यता के अनुरूप अन्य कार्य पर रोक नहीं लगाई गई और संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं हुई, तो संगठन मजबूरन उग्र आंदोलन करेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा की होगी.
