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MP News: ‘ट्रैक्टर रैली सिर्फ एक राजनीतिक दिखावा, हकीकत में किसान जूझ रहे हैं’, कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा

Congress leaders targeted the government regarding the tractor rally.

ट्रैक्टर रैली को लेकर कांग्रेस नेताओं सरकार पर निशाना साधा.

MP News: मध्य प्रदेश सरकार की ट्रैक्टर रैली को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने तीखा और संगठित पलटवार किया है. इंदौर में कांग्रेस नेताओं ने एक सुर में भाजपा सरकार को किसान विरोधी, खोखली घोषणाओं वाली और जमीनी हकीकत से कटी हुई सरकार करार दिया. नेताओं का कहना है कि ट्रैक्टर रैली सिर्फ एक राजनीतिक दिखावा है, जबकि खेतों में किसान आज भी खाद, दाम और भविष्य तीनों के संकट से जूझ रहा है.

‘योजनाएं जमीन पर नहीं उतरती’

कांग्रेस नेता अजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की किसी भी घोषणा पर भरोसा नहीं है. अजय सिंह ने दो टूक कहा, ‘मैं मोहन यादव जी को बहुत अच्छी तरह जानता हूं. जब वे कोई घोषणा करते हैं, तो समझ लीजिए कि जमीन पर उसका उल्टा ही होने वाला है. हालात ऐसे हैं कि इस साल के अंत तक किसान और ज्यादा परेशान होगा.’

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान की दिशा में सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. उन्होंने कहा, ‘खाद नहीं मिल रही, किसान को उसकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा. किसी भी समस्या का कोई इलाज नहीं हो रहा.’

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भाजपा सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, ‘यह वर्ष भारतीय जनता पार्टी के जाने का वर्ष है. किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं, खाद के लिए लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है. भाजपा ने जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं हुए. यह सरकार पूरी तरह किसान विरोधी है.’

‘BJP की कथनी और करनी में अंतर है’

पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि भाजपा की कथनी–करनी में अंतर है. उन्होंने कहा, ‘किसान अपनी वाजिब मांगें पूरी न होने से परेशान है. यही वह सरकार है, जो तीन काले कृषि कानून लाना चाहती थी. इनके शब्द और काम में फर्क अब हर किसान समझ चुका है.’

उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर रैली किसानों के हित में नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी छिपाने का जरिया है. कुल मिलाकर, कांग्रेस ने सरकार की ट्रैक्टर रैली को राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए साफ कर दिया है कि जब तक खाद, दाम और कर्ज के मुद्दे हल नहीं होते, तब तक ऐसे आयोजन किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने से ज्यादा कुछ नहीं हैं.

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