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दमोह में दिखी भाईचारे की शानदार मिसाल, हिंदू परिवार ने मुस्लिम लड़की का किया पालन-पोषण, पूरे गांव ने मिलकर कराया निकाह

damoh villagers celebrated the wedding of muslim girl by hindu family

हिंदू परिवार ने मुस्लिम लड़की का कराया निकाह

MP News (दमोह से अर्पित बड़कुल की रिपोर्ट): मध्य प्रदेश के दमोह जिले से सामने आई तस्वीर ने नफरत के शोर में मोहब्बत की सबसे बुलंद आवाज बन गई है. जहां मजहब नहीं, बल्कि इंसानियत सबसे ऊपर नजर आई. जिले के निबौरा गांव में हिंदू और मुस्लिम नहीं बल्कि एक परिवार भी रहता है. पूरी गांव ने मिलकर बेटी नगमा का निकाह किया और मजहबी एकता की शानदार मिसाल पेश की.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, ये कहानी तेंदूखेड़ा ब्लॉक के निबौरा गांव की है. जहां एक हिंदू परिवार ने मुस्लिम कॉम की बेटी नजमा को सिर्फ पाला ही नहीं बल्कि बेटी बनाकर विदा भी किया. निबौरा गांव में रहने वाले रामराज यादव जिन्होंने धर्म नहीं देखा, देखी सिर्फ एक मजबूर बच्ची की तकलीफ.

आर्थिक तंगी से जूझ रहे मुस्लिम परिवार की बेटी नजमा, जिसके माता-पिता रोज़गार की तलाश में दिल्ली चले गए थे. गांव में नजमा अपनी दादी के साथ अकेले रहती थी. धीरे-धीरे नजमा बड़ी हुई. जब उसकी शादी का समय आया तो तेजगढ़ निवासी शाहिद खान के साथ उसका रिश्ता तय हुआ. फिर वह मुबारक घड़ी आई जब नजमा का निकाह सिर्फ मुस्लिम समाज ने नहीं बल्कि पूरे गांव ने मिलकर सम्पन्न कराया.

हिंदू परिवार के घर से उठी नजमा की डोली

नजमा की शादी की सभी रस्में रीति-रिवाज रामराज यादव के घर से पूरी हुईं. हिंदू समाज ने बारातियों का स्वागत किया और मुस्लिम समाज ने धार्मिक रस्में निभाईं. सुर्ख जोड़े में सजी नजमा. जब दूल्हे शाहिद के साथ विदा हुई तो सिर्फ एक बेटी नहीं दो समाजों के दिल भी जुड़ गए.

‘धर्म अलग, इंसानियत एक’

निबौरा निवासी रामराज यादव ने बताया कि धर्म अलग हो सकता है, लेकिन इंसानियत एक ही होती है, नजमा हमारी बेटी है. तेजगढ़ से बारात लेकर नजमा के घर पहुंचे पूर्व सरपंच फरमान खान ने कहा कि यह शादी यादगार रही, जहां हिंदू मुस्लिम भाई-भाई की मिसाल देखने को मिली है. तो वही न के पिता गुड्डू खान का मानना है कि जिस तरह हिंदू समाज ने साथ दिया है वह जिंदगी भर नहीं भूलेंगे.

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विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड अध्यक्ष विदित सिंह तोमर ने बताया कि सनातन की यही संस्कृति रही है कि हमने हमेशा मानवता भाईचारे और प्रेम को सबसे ऊपर रखा है. आज दमोह में वही सनातन संस्कार जीवित नजर आए हैं.

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