MP News: मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षक विभाग की बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है, जहां कड़ाके की ठंड में आज भी मासूम बच्चे टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं. जबकि विस्तार न्यूज़ की खबर के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा था कि तीन दिन बाद बच्चों को नया भवन मिलेगा, लेकिन आज फिर एक बार वही खराब सिस्टम की लापरवाही की तस्वीर देखने को मिल रही है.
विस्तार न्यूज़ ने खबर को प्राथमिकता से दिखाया था
भोपाल के कटारा हिल्स थाने क्षेत्र में सांदीपनी स्कूल की खबर विस्तार न्यूज़ ने प्राथमिकता से दिखाई थी. इसमें बताया गया था कि किस प्रकार से कड़ाके की ठंड के बीच में मासूम बच्चे टीन शेड के नीचे बैठकर अपना भविष्य बनाने को मजबूर हैं. जब विस्तार न्यूज़ एक बार फिर ग्राउंड जीरो पर खबर करने पहुंचा, तो देखा कि विभाग की लापरवाही फिर देखने को मिल रही है. जबकि लग रहा था कि बहुत जल्द मासूम बच्चों को नया स्कूल मिल जाएगा. इसके बाद भी अभी तक बच्चों को नया स्कूल नहीं मिला है.
स्कूल में टूटी दीवारें और लोहे की टीन
पुराने स्कूल में 1100 छात्र पढ़ते हैं, जिसमें कहीं ना कहीं छोटा स्कूल होने के कारण परेशानी देखने को मिलती है. हालांकि टूटी दीवार, लोहे की टीन के नीचे बैठकर बच्चे अपना भविष्य बनाते दिखे दिखाई दे रहे हैं. जबकि आलीशान बड़ा भवन बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही और मनमानी के चलते अभी तक बच्चे इस नए भवन से वंचित दिखाई दे रहे हैं, हालांकि बड़े अधिकारी अभी भी ठेकेदार से स्कूल अपने हैंडोवर नहीं ले पाए हैं, क्योंकि जिस प्रकार से जानकारी मिली है कि करीब चार करोड़ का भुगतान ठेकेदार का अभी भी स्कूल विभाग ने नहीं किया है. जिसके चलते ठेकेदार स्कूल हैंडोवर देने से मना कर रहे हैं.
मंत्री के कहने के बाद भी बड़ी लापरवाही
वहीं खबर दिखाने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विस्तार न्यूज़ पर कहा था कि तीन दिन के अंदर बच्चों को नया भवन मिलेगा, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी अभी तक बच्चों को नया भवन नहीं मिला, जबकि 25 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सांदीपनी स्कूल का शुभारंभ किया था. लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही और सिस्टम के फेलियर के चलते अभी भी ठेकेदार ने बच्चों को नया भवन नहीं दिया. वहीं विस्तार न्यूज़ के सवालों से मंत्री बचते दिखाई दिए. मंत्री ने कहा कि बहुत जल्द लापरवाही करने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाएगी. हालांकि जिन स्कूलों में बच्चों को बैठना चाहिए, उन क्लासों में अभी ताले लगे दिखाई दे रहे हैं.
स्कूल शिक्षा विभाग का फेलियर
स्कूल शिक्षा विभाग का फेलियर पूरी तरह दिखाई दे रहा है. मासूम बच्चे आज भी परेशान होते दिखाई दे रहे हैं, हालांकि जवाबदारों से एक बार फिर विस्तार न्यूज़ ने बातचीत की, जहां जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवाल ने कहा कि अभी तक ठेकेदार का बिल भुगतान विभाग ने नहीं किया है, जिसके चलते बच्चों को नया स्कूल अभी तक नहीं मिल पाया है. जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि लगातार वह पत्र विभाग के अधिकारी को लिख रहे हैं, लेकिन ठेकेदार से वार्तालाप अभी नहीं हो पाई है.
ये भी पढ़ें: केंद्र की GST दरों में कमी का इफेक्ट, एमपी को होगा जीएसटी कलेक्शन में 3 हजार करोड़ का घाटा
