MP News: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार देश की नई जनगणना का बिगुल बज चुका है. इंदौर में अप्रैल महीने से डिजिटल जनगणना की शुरुआत होने जा रही है, जो अब तक की सबसे आधुनिक और तकनीक आधारित जनगणना मानी जा रही है. इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है, क्योंकि पहली बार आम नागरिकों को स्व-गणना यानी खुद अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा दी जा रही है.
जिला कलेक्टर ने जारी किए दिशा-निर्देश
इंदौर जिले में जनगणना की तैयारियों को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए. बैठक के साथ ही जिले में डिजिटल जनगणना की औपचारिक तैयारियां शुरू हो गई हैं.
इस बार की जनगणना में क्या अलग है?
अब तक की जनगणना प्रक्रिया में कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी लेते थे, जिसमें समय भी ज्यादा लगता था और कई बार लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता था. लेकिन इस बार सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाया है. नागरिक अब एक विशेष मोबाइल ऐप या पोर्टल के जरिए खुद अपनी और अपने मकान से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे.
डिजिटल जनगणना के तहत परिवार के सदस्यों की संख्या, आयु, शिक्षा, रोजगार, आवास की स्थिति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां ऐप के माध्यम से दर्ज की जाएंगी. इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों में पारदर्शिता और सटीकता भी बढ़ेगी.
डोर-टू-डोर डाटा कलेक्शन भी होगा
हालांकि जिन लोगों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं होगी. उनके लिए पहले की तरह जनगणना कर्मचारी घर जाकर जानकारी जुटाएंगे. प्रशासन का दावा है कि किसी भी नागरिक की जानकारी छूटे, ऐसा नहीं होने दिया जाएगा. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल जनगणना से डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड होगा. जिससे फर्जी या दोहरी एंट्री की संभावना भी कम होगी. साथ ही यह डेटा भविष्य की योजनाओं, विकास कार्यों और सरकारी नीतियों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा.
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इंदौर से शुरू हो रही जनगणना
इंदौर में शुरू हो रही यह डिजिटल जनगणना न सिर्फ शहर को तकनीक के मामले में एक कदम आगे ले जाएगी, बल्कि आने वाले समय में स्मार्ट सिटी योजनाओं को और मजबूत आधार भी प्रदान करेगी. अब देखना होगा कि इंदौरवासी इस नई व्यवस्था को किस तरह अपनाते हैं और डिजिटल जनगणना कितनी सफल साबित होती है.
