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MP News: एमपी में सिंथेटिक ड्रग्स का विस्फोट, दो साल में बना नया ‘नशा कॉरिडोर’, केंद्र सरकार की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

The drug trade has increased in Madhya Pradesh

मध्‍य प्रदेश में बढ़ा नशे का कारोबार

MP News: मध्य प्रदेश में नशे का कारोबार अब केवल गांजा और अफीम तक सीमित नहीं रहा है. बीते दो वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी और खपत में जिस तेजी से उछाल आया है, उसने केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2024 और 2025 के दौरान मध्य प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स की जब्ती कई गुना बढ़ी है. हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने नशा निरोधक एजेंसियों को अतिरिक्त फंड भी जारी किया है.

रिपोर्ट में सामने आए तस्‍करी के कई मामले

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 से 2026 के बीच मध्य प्रदेश में लाखों किलो गांजा और अफीम की तस्करी के मामले सामने आए हैं. हालांकि वर्ष 2024 में सिंथेटिक ड्रग्स की जब्ती 1082 किलो तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यह साफ संकेत है कि तस्करों ने पारंपरिक नशे से हटकर केमिकल और सिंथेटिक ड्रग्स की ओर रुख कर लिया है. इसकी खपत खासतौर पर युवाओं में तेजी से बढ़ रही है. आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि जहां गांजा और अफीम की मात्रा में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, वहीं सिंथेटिक ड्रग्स में अचानक विस्फोटक बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार

दूसरे राज्यों से बढ़ी घुसपैठ

रिपोर्ट में बताया गया है कि चंबल अंचल को छोड़ दिया जाए तो उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र से आने वाले तस्करों की संख्या तेजी से बढ़ी है. मध्य प्रदेश अब ड्रग्स की सप्लाई और ट्रांजिट का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है. इसी कारण राज्य पुलिस के साथ-साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने कई जिलों में संयुक्त छापेमारी कर तस्करों को गिरफ्तार किया है.

फंड बढ़ा तो खतरा भी बड़ा

केंद्र सरकार ने यह भी माना है कि पिछले चार वर्षों में मध्य प्रदेश को नशा रोकथाम के लिए कोई अतिरिक्त फंड नहीं दिया गया था. लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2025-26 में 79 लाख रुपये का विशेष बजट जारी किया गया है. यह फंड जांच, तकनीकी संसाधनों और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने में खर्च किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिंथेटिक ड्रग्स पर समय रहते सख्ती नहीं की गई, तो यह समस्या कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकती है.

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