MP News: मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अनिवार्य रूप से समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए जाने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री के निर्देशों के बीच, जब वे दौरे पर हैं और मुख्य सचिव भी प्रदेश से बाहर कार्यक्रम में शामिल हैं, तब सामान्य प्रशासन विभाग ने मंत्रालय परिसर में औचक निगरानी शुरू कर दी. सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय के विभिन्न विभागों में देर से आने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार की गई, जिससे कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई. समयपालन को लेकर यह कार्रवाई सरकार की कार्यसंस्कृति सुधारने की पहल के रूप में देखी जा रही है.
‘नियम केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए’
इस बीच मध्य प्रदेश कर्मचारी अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन यह नियम केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए.
जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कई अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और जनता से मिलने के लिए निर्धारित एक घंटे का बोर्ड तो लगा देते हैं, लेकिन जब आम नागरिक मिलने आते हैं तो अधिकारी बैठक में व्यस्त हो जाते हैं. उन्होंने मांग की कि ऐसे अधिकारियों की भी मॉनिटरिंग की जाए और उनकी उपस्थिति व कार्यशैली की सूची सार्वजनिक की जाए.
‘फाइव डेज वर्किंग व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए’
कर्मचारी नेता ने यह भी कहा कि यदि समयपालन का नियम सभी स्तरों पर समान रूप से लागू नहीं किया गया, तो ‘फाइव डेज वर्किंग’ व्यवस्था पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि या तो सभी कर्मचारी और अधिकारी समान नियमों के तहत काम करें, अन्यथा सप्ताह में छह दिन कार्य प्रणाली को फिर से लागू किया जाए.
इस पूरे घटनाक्रम ने मंत्रालय की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है. एक ओर सरकार प्रशासनिक अनुशासन मजबूत करने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर कर्मचारी संगठन पारदर्शिता और समान नियम लागू करने की मांग उठा रहे हैं. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच चर्चा की संभावना जताई जा रही है.
ये भी पढ़ें: Kuno National Park: कूनो नेशनल पार्क में एक करोड़ के बकरे चट कर गए चीते, रखरखाव का खर्च 100 करोड़ पार
