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MP में करप्शन के खिलाफ सरकार का बड़ा फैसला, दागी अफसर पर केस चलाने की अनुमति अब संबंधित विभाग देगा

Chief Minister Mohan Yadav (File Photo)

मुख्यमंत्री मोहन यादव(File Photo)

MP News: लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी अफसरों पर कार्रवाई की अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से सरकार ने अब भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हुए अब अभियोजन स्वीकृति का अधिकार सीधे विभागों को दे दिया है. सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार में लिप्त, रिश्वतखोर, वित्तीय अनियमितताएं, गबन-घोटाले में लिप्त अफसरों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति अब इन अफसरों को नियुक्त करने वाले विभाग स्वयं देंगे.

GAD ने कार्य आवंटन नियमों में किया संशोधन

इनके लिए सामान्य प्रशासन विभाग और विधि विभाग के पास प्रस्ताव नहीं भेजना होगा. केवल उनके अभिमत इनमें लिए जाएंगे. इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने मध्यप्रदेश शासन कार्य आवंटन नियमों में संशोधन कर दिया. जीएडी ने किया कार्य आवंटन नियमों में संशोधन है. कार्य आवंटन नियमों के नियम दो में अनुसूची में बदलाव करते हुए अब यह किया गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 218 और विशेष, अन्य अधिनियमों में के अधीन लोक सेवकों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति में अब सीधे विभागों को ही अधिकार दे दिए गए हैं. जो उन दागी अफसरों के नियोक्ता विभाग है. इसमें मध्यप्रदेश राज्य शासन के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 197 और 299 के अधीन किए गए दांडित अपराधों तथा आपराधिक षड्यंत्र के अपराधियों के अभियोजन के लिए भारतीय नागरिक सुरक्ष संहिता 2023 की धारा 217 के अधीन पूर्व अनुमति और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 218 तथा विशेष, अन्य अधिनियमों के अंतर्गत लोक सेवकों के विरुद्ध अभियोजन की मंजूरी देने के अधिकार अब सीधे विभाग को दिए गए है.

जांच एजेंसियों को मिलेगी मदद और कोर्ट में पहुंचेंगे केस

सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों को कहना है कि अभी तक भ्रष्टाचार के मामले में विभाग अनुमति कई मामलों में नहीं देता था लेकिन अब उसी को बाध्य कर दिया गया है. ऐसे में अभी जो जांच एजेंसियों के पास केस पेंडिंग है. वह भी कोर्ट तक पहुंचेंगे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. हालांकि यह बात और है कि अफसर कोशिश विभाग की तरफ से दागी अफसर को बचाने की की जाती है. ऐसे कई मामले मध्य प्रदेश में उदाहरण के तौर पर आए हैं. फिर भी उम्मीद है कि नए बदलाव से भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी कर्मचारियों को जेल भेजा जाएगा.

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