MP News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में महज पांच दिनों मे एक मासूम समेत रेबीज से तीन लोगों की मौत से हड़कंप मच गया है. सबसे चौंकानी वाली बात ये है कि एक बच्चे की मौत एंटी रेबीज के तीन डोज इंजेक्शन लगने के बाद हुई. इसके बाद ड्रग की गुणवत्ता पर ही सवाल उठने लगे हैं. खुद स्वास्थ्य विभाग मे भी हड़कंप है और वह मामले की जांच कराने की बात कह रहे हैं.
सिस्टम की लापरवाही बना जानलेवा
ग्वालियर मे सड़कों पर स्वछन्द घुमते आवारा कुत्तों से लोगो के भयभीत होने और शिकार बनने को लेकर और इस पर लगाम लगाने में प्रशासन स्वास्थ्य सिस्टम की लापरवाही और नाकामी अब जानलेवा बनने लगी है. इसका चौंकाने वाला खुलासा खुद न्यू जयारोग्य अस्पताल में सामने आया है, यहां 5 दिनों में रेबीज से 3 मरीजों की मौत हो चुकी है. इनमें सबसे चौंकाने वाला मामला दतिया जिले से आये 6 साल के मासूम हंस प्रजापति का है. मासूम को डॉग बाईट के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन की तीन डोज लगने के बावजूद रेबीज विकसित हो गया और अंततः उसकी मौत हो गई. यह मामला न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी बताता है कि आवारा कुत्तों को लेकर प्रशासन के दावे कितने सच हैं. खुद स्वास्थ्य विभाग मे डोज के बाद भी बच्चे की मौत से हड़कंप है और ड्रग पर ही सवाल खड़े हो गए है.
‘जिस दिन कुत्ते ने काटा, उसी दिन से हो रहा था इलाज’
दतिया निवासी हंस के पिता अशोक उर्फ कल्लू प्रजापति ने हॉस्पिटल मे बताया था कि हंस को जिस दिन आवारा कुत्ते ने काटा था, डॉक्टर की सलाह पर तत्काल इलाज शुरू कर दिया था. स्थानीय डॉक्टरों की सलाह और देखरेख में उसे पहला डोज 13 जनवरी को दिया गया. उसके बाद 16 जनवरी और फिर 21 जनवरी को एंटी रैबीज वैक्सीन की डोज लगवाए. चौथा इंजेक्शन 10 फरवरी को लगना था, लेकिन इससे पहले ही बीते शुक्रवार को बच्चे में रेबीज के लक्षण दिखने लगे. वह चौंकने लगा. उसे हवा और पानी से डर लगने लगा. इसके बाद परिवार वाले बच्चे को कमलाराजा अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन हालत नहीं सुधरी तो वहां से शनिवार को बच्चे की छुट्टी कराकर दतिया चले गए, जहां शनिवार-रविवार की रात उसकी मौत हो गई.
इंजेक्शन लगवाने के बावजूद हुई मौत
सवाल यही है कि पीड़ित को डॉक्टरों द्वारा बताई गई तारीख को इंजेक्शन लगवाए गए. फिर बच्चे की मौत कैसे हो गई? अगर इंजेक्शन सही थे तो रेबीज कैसे हुआ? खुद डॉक्टर मान रहे है कि एंटी रेबीज के 3 डोज लगने के बाद रेबीज होना बेहद दुर्लभ माना जाता है. जयारोग चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक और पब्लिक रिलेशन अधिकारी डॉ मनीष चतुर्वेदी ने स्वीकार किया कि बीते पांच दिनों मे डॉग बाईट के शिकार तीन लोगों की मौत हुई है, जो चिंताजनक है. हालांकि इनमें ग्वालियर का एक मरीज है. एक अन्य मरीज टीकमगढ़ का रहने वाला था. लेकिन सबसे चिंता की वजह दतिया निवासी छह साल के मासूम की मौत है, क्योंकि उसे एंटी रेबीज के तीन डोज लग चुके थे. यह रेयर टू रेयरेस्ट मामला है, क्योंकि तीन डोज के बाद रेबीज नहीं फैलता. इसमें कई स्तर की जांच कराई जायेगी. जिसमें देखभाल से लेकर ड्रग की जांच भी शामिल है.
