MP News: चंबल की रेत पर किसका राज चलेगा, रेत माफिया का या कानून का? अब इस जंग में प्रशासन ने तकनीक का नया हथियार उतार दिया है. चंबल के घाटों पर अब AI की तीसरी आंख पहरा देगी. रेत के अवैध उत्खनन से लेकर संदिग्ध वाहनों की आवाजाही तक, हर गतिविधि पर नजर रखने की तैयारी है. रेत माफिया ने अगर रात के अंधेरे में भी खेल करने की कोशिश की, तो AI सिस्टम अलर्ट जारी करेगा.
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद चंबल में अवैध रेत उत्खनन रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. इसी को देखते हुए रिठौरा घाट पर 45 मीटर ऊंचा AI टावर तैयार किया गया है. करीब सवा करोड़ रुपये की लागत वाली इस व्यवस्था से पांच वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी की जाएगी. वहीं, हाईवे पर अवैध रेत और पत्थरों के परिवहन पर नजर रखने के लिए दो AI ई-चेकगेट भी लगाए गए हैं. फिलहाल इन तीनों व्यवस्थाओं का 15 दिन का ट्रायल चल रहा है.
घाटों में जरा-सा बदलाव, सिस्टम देगा अलर्ट
इस बार निगरानी सिर्फ कैमरों तक सीमित नहीं रहेगी. विशेष सॉफ्टवेयर घाटों की सामान्य स्थिति में बदलाव, नए गड्ढे बनने और रेत के टापुओं की स्थिति बदलने जैसी गतिविधियों को पहचानने के लिए तैयार किया जा रहा है. जेसीबी, हाइड्रा और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे वाहनों की पहचान के लिए भी उनकी विशेषताएं सॉफ्टवेयर में दर्ज होंगी. सेंसर और CCTV कैमरों से फोटो-वीडियो जुटाकर संदिग्ध गतिविधियों के साक्ष्य तैयार किए जाएंगे.
अधिकारियों की कमी भी बनी चुनौती
देवरी घड़ियाल केंद्र में सुप्रीम कोर्ट के प्रतिनिधि की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक में मुरैना, भिंड, ग्वालियर, धौलपुर और आगरा सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, एसपी, डीएफओ और अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में वन एवं खनन विभाग में कर्मचारियों और आरक्षकों की कमी पर चिंता जताई गई. नई भर्ती के लिए सरकार को पत्र लिखने की बात भी सामने आई.
डीएफओ एससीएस बघेल के मुताबिक, ट्रायल के दौरान AI टावर और ई-चेकगेट से सूचनाएं मिलने लगी हैं. सर्वर की तकनीकी समस्या को भी दुरुस्त कर दिया गया है. टावर को डीएफओ कार्यालय और पुलिस कंट्रोल रूम से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है.
अब असली परीक्षा कार्रवाई की!
तकनीक तैयार है, निगरानी का इंतजाम भी हो रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AI की यह तीसरी आंख चंबल के रेत माफिया पर वास्तव में शिकंजा कस पाएगी? चंबल के घड़ियालों और नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए अब जरूरी है कि अलर्ट मिलते ही कार्रवाई हो और अवैध उत्खनन करने वालों पर सख्ती दिखाई दे.
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