Input- मनोज शर्मा
MP News: मुरैना की चंबल कॉलोनी स्थित भूजल सर्वेक्षण इकाई कार्यालय वर्षों से बंद पड़ा होने के बावजूद चर्चाओं में है. कार्यालय भवन की स्थिति देखकर प्रतीत होता है कि यहां लंबे समय से नियमित गतिविधियां नहीं हुई हैं. मुख्य द्वार पर जंग लगा ताला लटका है, जबकि भवन जर्जर अवस्था और उपेक्षा का शिकार नजर आता है.
स्थानीय लोगों और आसपास के कर्मचारियों के अनुसार, कार्यालय में पदस्थ सब इंजीनियर हरिशंकर शाक्य और चौकीदार रामू कभी-कभार ही कार्यालय आते हैं. आरोप है कि अधिकांश कार्य ग्वालियर से संचालित किए जा रहे हैं, जबकि मुरैना स्थित कार्यालय लगभग निष्क्रिय बना हुआ है.
ऑफिस में ताला, फिर भी चल रहे हैं मीटर
सबसे बड़ा सवाल कार्यालय के बाहर लगे बिजली मीटर को लेकर उठ रहा है. वर्षों से कार्यालय बंद होने के बावजूद मीटर की नियमित रीडिंग दर्ज हो रही है. ऐसे में स्थानीय नागरिक यह जानना चाहते हैं कि जब कार्यालय में कोई नियमित गतिविधि नहीं हो रही, तो बिजली की खपत आखिर किस कार्य में हो रही है.
कार्यालय के समीप स्थित जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि यहां किसी अधिकारी या कर्मचारी की नियमित उपस्थिति नहीं रहती. कभी-कभार कोई कर्मचारी आता दिखाई देता है, लेकिन कार्यालय में सामान्य प्रशासनिक कार्य होते नहीं दिखते.
भूजल सर्वेक्षण इकाई की निष्क्रियता पर भी सवाल
इधर, जिले में लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच भूजल सर्वेक्षण इकाई की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग द्वारा लंबे समय से क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय सर्वेक्षण, जनजागरूकता अभियान या जनहित से जुड़ी गतिविधि दिखाई नहीं दी है.
इस संबंध में जल संसाधन विभाग के सहायक ग्रेड-2 कमल माहौर का कहना है कि कार्यालय भूजल सर्वेक्षण इकाई का है और वहां की व्यवस्था संबंधित विभाग के अधीन है. यदि कार्यालय बंद है या अन्य कोई स्थिति है तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली जा सकती है. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और वर्षों से बंद पड़े कार्यालय, कर्मचारियों की उपस्थिति तथा बिजली खपत के मामले की जांच कराता है या नहीं.
