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ग्वालियर: रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन महिला से 1.57 करोड़ की ठगी, IPS और CBI अफसर बनकर लगाया चूना

Gwalior News

साइबर क्राइम ग्वालियर

Gwalior: ग्वालियर में साइबर ठगों ने स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड 69 वर्षीय लैब टेक्नीशियन महिला को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर एक करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपए की ठगी कर ली. बदमाशों ने खुद को टेलीकॉम विभाग, दिल्ली पुलिस के आईपीएस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बताकर महिला को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और 33 दिनों तक डराकर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करवा ली.

क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई शिकायत

सरदार पाटनकर साहब का बाड़ा निवासी मीनाक्षी नाखरे, पति रमेश नाखरे ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने बताया कि 10 मई 2026 को उनके पास एक कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली टेलीकॉम विभाग का अधिकारी अशोक गुप्ता बताते हुए कहा कि उनके नाम से एक मोबाइल नंबर और बैंक खाता संचालित हो रहा है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी गतिविधियों में किया गया है.

दिल्ली पहुंचने और गिरफ्तारी की चेतावनी

जब मीनाक्षी ने आरोपों से इनकार किया तो आरोपी ने उन्हें दो घंटे में दिल्ली पहुंचने और गिरफ्तारी की चेतावनी दी. इसके बाद उनके बेटे अनुभव नाखरे के मोबाइल पर वीडियो कॉल किया गया. वीडियो कॉल के दौरान दिल्ली पुलिस का लोगो और सरकारी कार्यालय जैसा बैकग्राउंड दिखाई दिया.यूनिफॉर्म पहने एक व्यक्ति ने खुद को आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया.

मीनाक्षी के नाम की फर्जी पासबुक बरामद

ठगों ने दावा किया कि आईसीआईसीआई बैंक के एक मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद मीनाक्षी के नाम की फर्जी पासबुक बरामद हुई है और उनके खाते से 6.80 करोड़ रुपए के अवैध लेनदेन हुए हैं. साथ ही उन्हें 68 लाख रुपए कमीशन मिलने का भी आरोप लगाया गया.

इसके बाद आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि जांच पूरी होने तक उनके सभी फंड की जांच की जाएगी और उन्हें अपनी पूरी राशि सुरक्षित खातों में ट्रांसफर करनी होगी. जांच के बाद रकम वापस करने का भरोसा भी दिया गया.

डर और मानसिक दबाव में आकर मीनाक्षी ने 33 दिनों के दौरान चार राज्यों के 10 से अधिक शहरों में संचालित विभिन्न बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए कुल एक करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए.

18 जून तक क्लीन चिट की एनओसी मिल जाएगी

11 जून को ठगों ने महिला को बताया कि जांच पूरी हो चुकी है और 18 जून तक क्लीन चिट की एनओसी उनके घर पहुंच जाएगी. लेकिन 16 जून की रात के बाद सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए. संदेह होने पर मीनाक्षी दिल्ली के बाराखंभा थाने पहुंचीं, जहां उन्हें पता चला कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं.

ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि साइबर सेल ने संबंधित बैंक खातों को होल्ड कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. साइबर एक्सपर्ट की टीमें मामले की जांच में जुटी हैं. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जांच एजेंसी या अधिकारी के नाम पर फोन आने पर घबराएं नहीं और तत्काल स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें.

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