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कूनो के चीता ‘ब्रो’! देसी-विदेशी दो चीते बने जिगरी दोस्त, बॉन्डिंग देख वन विभाग भी हैरान

kuno cheetah friendship bonding

कूनो में दो चीतों की दोस्ती हो रही वायरल

Desi Foreign Bond: श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में देसी और विदेशी चीतों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है. भारत में इनकी संख्या बढ़कर 49 हो चुकी है. इनमें 32 चीतों को का जन्म मध्य प्रदेश में ही हुआ है. इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात ये है कि चीते परिवार की तरह रहने लगे हैं. इनमें दो चीतों इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं. इनकी बॉन्डिंग देखकर वन विभाग भी हैरान है.

बड़े बाड़े से शुरू हुई दोस्ती

विदेशी धरती से आए और भारतीय जमीन पर जन्मे चीतों के बीच बॉन्डिंग लगातार बढ़ रही है. भारत में जन्मा KNG-23 और बोत्सवाना से लाए गए 2 साल के CCB-4 चीते की कहानी 30 मई 2026 से शुरू होती है. दरअसल, मादा चीता निर्वा और शावकों को खुले जंगल में छोड़ा गया था. कुछ दिनों बाद KNG-23 चीता अपनी मां, भाई और बहन से अलग हो गया था. इस दौरान वह घायल हो गया, जहां से उसे बड़े बाड़े में शिफ्ट कर दिया गया. यहां वह बोत्सवाना से आए नर चीते CCB-4 के संपर्क में आया.

दरअसल, CCB-4 चीते को 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से भारत लाया गया था. उसकी बहनों को पहले ही खुले जंगल में छोड़ दिया गया था. इस दौरान वह बड़े बाड़े में अकेला रहा. इस दौरान KNG-23 की मुलाकात CCB-4 से हुई.

फ्रेंडशिप बनेगी मिसाल!

दरअसल, दोनों चीतों की दोस्ती वन विभाग को हैरान कर रही है. दोनों साथ घूमते हुए नजर आते हैं. दोनों खाना भी शेयर करके खाते हैं. इसके साथ ही दोनों एक-दूसरे को खदेड़ने की कोशिश भी नहीं की. दोनों नर चीतों का बैकग्राउंड अलग-अलग रहा है. दोनों अलग-अलग परिस्थितियों में रहे और पालन-पोषण हुआ. वन विभाग चीतों के इस व्यवहार को बेहद खास मान रहा है. वहीं, अधिकारियों का इस बारे में कहना है कि इस तरह दो विभिन्न देशों के चीतों के इस तरह की दोस्ती मिसाल बन जाएगी.

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क्या है प्रोजेक्ट चीता?

भारत में चीता बसाने के लिए भारत सरकार ने पहल की. कई साल की मेहनत के बाद मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित कूनो पालपुर नेशनल पार्क में चीतों को आबाद करने की मुहिम शुरू हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को छोड़ा. धीरे-धीरे चीतों की संख्या में इजाफा होता गया और क्षेत्र छोटा पड़ने लगा. कुछ चीते भागकर राजस्थान भी पहुंच गए थे. मंदसौर के गांधी सागर अभ्यारण्य में चीतों को बसाने की पहल शुरू हुई है. कूनो से लाकर यहां 3 चीतों को छोड़ा गया है. इसके साथ ही मध्य प्रदेश के ही नौरादेही अभ्यारण्य में भी जगह तलाशने की कोशिश जारी है.

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