Morena News: (मनोज शर्मा की रिपोर्ट) मुरैना जिले की ग्राम पंचायत इमलिया में मनरेगा के जॉबकार्ड और मस्टर रोल को लेकर उठे सवालों ने अब जिला पंचायत अधिकारियों की जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमलेश कुमार भार्गव ने मामले में वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कुछ जॉबकार्डों में मृत मुखियाओं की मृत्यु के बाद नए सदस्यों के नाम जोड़े जाने और उनके नाम से मनरेगा में कार्य उपलब्ध कराने की बात कही है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन व्यक्तियों के नाम बाद में जॉबकार्ड में जोड़े गए. यदि वे गांव और संबंधित परिवार में हैं ही नहीं, तो फिर उनकी ओर से मनरेगा में काम की मांग किसने की और मस्टर रोल में उनकी उपस्थिति कैसे दर्ज हुई?
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक जॉबकार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/41 में दर्ज दिलीप की मृत्यु 12 अक्टूबर 2010 को हो चुकी थी. इसके बाद इसी जॉबकार्ड में वीरू नामक व्यक्ति को सदस्य के रूप में जोड़ा गया. सवाल है कि यदि वीरू संबंधित परिवार और गांव में है ही नहीं, तो उसके नाम से मनरेगा में काम की मांग किसने की और भुगतान किस आधार पर हुआ?
इसी तरह जॉबकार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/236 में दर्ज महाराज सिंह की मृत्यु 23 जनवरी 2023 को हुई. इसके बाद जॉबकार्ड में कमलेश और रामवीर के नाम जोड़े गए. आरोप है कि ये दोनों भी संबंधित गांव में मौजूद नहीं हैं. फिर इनके नाम से काम की मांग और मजदूरी का रिकॉर्ड कैसे तैयार हुआ?
ग्रामीण ने क्या दावा किया?
जॉबकार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/14 में दर्ज दामोदर बघेल की मृत्यु 23 जुलाई 2022 को हुई थी. इसके बाद विसन और शुभम के नाम सदस्य के रूप में जोड़े गए. ग्रामीणों का दावा है कि ये नाम भी संबंधित परिवार और गांव में मौजूद नहीं हैं. ऐसे में इनके नाम से मनरेगा में काम उपलब्ध कराने और मजदूरी दर्ज किए जाने की प्रक्रिया जांच के घेरे में है.
एक अन्य जॉबकार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/69, मुन्ना पुत्र ठकुरी के नाम से दर्ज है, जिसमें गुड्डी और लक्ष्मी सदस्य हैं. रिपोर्ट के अनुसार लक्ष्मी जीवित हैं और उनके द्वारा मनरेगा में कार्य की मांग किए जाने पर कार्य उपलब्ध कराया गया. लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन अन्य नामों की मौजूदगी ही परिवार और गांव में नहीं बताई जा रही, उन्हें जॉबकार्ड में शामिल किसने किया?
कागजों में जांच या जमीन पर हकीकत?
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल जांच की निष्पक्षता को लेकर है. ग्रामीणों का आरोप है कि जांच टीम ने मौके पर जाकर संबंधित परिवारों, ग्रामीणों और कथित मजदूरों की भौतिक जांच करने के बजाय दस्तावेजों के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी. यदि वास्तव में संबंधित व्यक्ति गांव और परिवार में मौजूद नहीं हैं, तो उनका आधार, समग्र आईडी, परिवार रजिस्टर, जॉबकार्ड में नाम जोड़ने का आवेदन, मनरेगा में काम की मांग और मस्टर रोल में दर्ज उपस्थिति की मौके पर जांच क्यों नहीं की गई?
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ग्रामीणों का आरोप है कि जांच में सचिव और सरपंच का बचाव किया गया है और पूरी प्रक्रिया कागजी कार्रवाई तक सीमित रही. अब मांग उठ रही है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच, संबंधित जॉबकार्डों का भौतिक सत्यापन, मस्टर रोल की जांच तथा भुगतान प्राप्त करने वाले खातों की पड़ताल कराई जाए.
