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कौन हैं संत मंसूर शाह? जिनके सामने ज्योतिरादित्य सिंधिया ने झुकाया सिर, 300 साल पुरानी है परंपरा

Sant Mansoor Shah Gwalior Jyotiraditya Scindia

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गोरखी मंदिर में पूजा-अर्चना की

Jyotiraditya Scindia Bows Head: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर के महाराजबाड़ा स्थित गोरखी मंदिर पहुंचे. जहां उन्होंने सूफी संत बाबा मंसूर शाह की पूजा अर्चना की. सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करके उन्होंने लिखा कि सिंधिया घराने के मार्गदर्शक और आराध्य संत के श्रीचरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए सभी देशवासियों के सुख-शांति, समृद्धि, प्रगति एवं सर्वांगीण विकास की प्रार्थना की.

300 साल से चली आ रही परंपरा

बाबा मंसूर शाह के उर्स में शामिल होना सिंधिया राजपरिवार के लिए परंपरा का हिस्सा है. 300 सालों से ये परंपरा चली आ रही है. उर्स के समय राजपरिवार के मुखिया यहां आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. गोरखी मंदिर में उनकी स्मृतियां यहां देखने को मिलती है. इसी परंपरा को निभाने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया मंगलवार (29 सितंबर) को यहां पहुंचे थे. सूफी संत के दरबार में पूजा की और आशीर्वाद लिया.

सिंधिया राजपरिवार की अटूट आस्था

सिंधिया राजवंश के संस्थापक महादजी सिंधिया पानीपत के तीसरे युद्ध में वे घायल हो गए थे. परिवार को उनके स्वस्थ होने की चिंता सता रही थी. बताया जाता है कि महादजी पत्नी और मां ने सूफी संत के दरबार में पहुंची थीं. तब सूफी संत ने उनके सही सलामत वापस लौटने की बात कही थी. कुछ दिनों बाद वे लौटे, इससे उनकी आस्था और गहरी हो गई.

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पांच पीढ़ियों तक राज करने का आशीर्वाद

ज्योतिरादित्य सिंधिया के पूर्वज महादजी सिंधिया बाबा मंसूर शाह के दरबार में पहुंचे थे. संत ने उन्हें आधी रोटी दी थी और पांच पीढ़ियों तक राज करने आशीर्वाद दिया था. बाबा की स्मृति में हर उर्स का आयोजन किया जाता है. इसी मौके पर गोरखी मंदिर में सिंधिया परिवार के मुखिया पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं.

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